नयी दिल्ली, 16 अक्टूबर (वार्ता) मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव एम ए बेबी ने दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों पर छात्र और युवा प्रदर्शनकारियों को शारीरिक एवं मानसिक प्रताड़ना देने का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व वाले गृह मंत्रालय के तहत पुलिसकर्मी बेखौफ होकर यह कार्रवाई कर रहे हैं। उन्होंने घटनाओं की गहन जांच और दोषियों को सजा देने की मांग करते हुए इस बात पर जोर दिया कि यह जवाबदेही नीचे से ऊपर तक तय की जानी चाहिए।
‘एक्स’ पर श्री बेबी ने कहा कि पुलिस उन युवा प्रदर्शनकारियों का शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न कर रही है, जो लोकतंत्र की रक्षा के लिए अपनी सुरक्षा जोखिम में डाल रहे हैं। उन्होंने 12 अक्टूबर को माकपा की ओर से आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन का हवाला दिया, जिसमें राजधानी में प्रदर्शनों के दौरान पुलिस बर्बरता के शिकार हुए लोगों ने अपनी आपबीती सुनाई थी। श्री बेबी ने संवाददाता सम्मेलन में मौजूद श्री फीडल रॉयस मामले की ओर विशेष ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि डॉक्टरों ने उनके कान की सर्जरी की आशंका जताई है। उन्होंने इस मामले को प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिसिया कार्रवाई के गंभीर परिणामों के उदाहरण के रूप में रेखांकित किया।
माकपा महासचिव ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिसकर्मी हिंसा की घटनाओं को रिकॉर्ड करने वाले लोगों को निशाना बना रहे हैं, जिनमें मौके पर मौजूद आम लोग भी शामिल हैं। उन्होंने पुलिस कार्रवाई का वीडियो रिकॉर्ड करने के आरोप में सेक्रेड हार्ट कैथेड्रल चर्च के पादरी फादर बीजू जेवियर को हिरासत में लिए जाने का जिक्र किया और सुरक्षा बलों के व्यवहार का दस्तावेजीकरण करने वाले लोगों के साथ हो रहे सलूक पर चिंता जताई। श्री बेबी ने यह भी आरोप लगाया कि मीडिया से बात कर रहे पार्टी के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास को घसीटकर पुलिस बस में डाला गया और वाहन के भीतर उनसे मारपीट की गई। इस आरोप ने दिल्ली में प्रदर्शनों के दौरान राजनीतिक प्रतिनिधियों, प्रदर्शनकारियों और कवरेज करने वालों के साथ पुलिस के रवैये को लेकर विपक्ष की चिंताओं को और बढ़ा दिया है।
इन घटनाओं को केवल व्यक्तिगत पुलिसकर्मियों की छिटपुट कार्रवाई मानने से इनकार करते हुए श्री बेबी ने कहा कि पूरी परिस्थितियों को देखते हुए कमान ढांचे और हर स्तर के अधिकारियों की जवाबदेही की जांच होनी चाहिए।
उन्होंने कहा, ” एक पूरी आदेश शृंखला काम कर रही है, जिसके कारण पुलिसकर्मी बेखौफ होकर यह मनमानी कर रहे हैं।” उन्होंने जोर देकर कहा कि कानून के शासन के तहत मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। राष्ट्रीय राजधानी में कानून के शासन के पालन पर सवाल उठाते हुए उन्होंने पूछा, “लेकिन क्या आज दिल्ली में कानून का शासन लागू है?”
उनका यह बयान दिल्ली में प्रदर्शनों से निपटने के तरीके को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच आया है, जिसमें विपक्षी दल पुलिस के रवैये और प्रदर्शनकारियों से व्यवहार पर सवाल उठा रहे हैं।
माकपा ने श्री फीडल रॉयस को आई चोटों, फादर बीजू जेवियर को हिरासत में लिए जाने और सांसद ब्रिटास से मारपीट के मामलों की जांच कर इसमें शामिल सभी लोगों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।

