अंकिता के भंडारी के पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी ने गुरुवार को यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि उन्हें दिल्ली आने के लिए बाध्य होना पड़ा है क्योंकि पिछले चार साल में उनकी बेटी को न्याय नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि वह और उनकी पत्नी बुधवार को उत्तराखंड से आने के बाद यहां इंडिया गेट पर धरना पर बैठ गये थे। उनकी मांग थी कि उनकी बेटी की हत्या के मामले जिन दुष्यंत कुमार गौतम का नाम सामने आया है उसको राज्यपाल नहीं बनाया जाना चाहिए था और उनकी नियुक्ति को रद्द किया जाना चाहिए। पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेने के बाद आज सुबह तड़के रिहा कर दिया था।
उन्होंने आरोप लगाया कि अंकिता हत्या के मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने सामने आए कई महत्वपूर्ण तथ्यों को आरोपपत्र में शामिल नहीं किया है। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी की एक चैट में एक वीआईपी को अतिरिक्त सेवाएं देने का उल्लेख था लेकिन एसआईटी ने उस चैट को हटा दिया। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनकी बेटी की एक साल की चैट मिटा दी गई है जबकि आरोपियों के बयानों में उन तथ्यों का उल्लेख था। उन्होंने कहा कि मामले के मुख्य आरोपी पुलकित आर्य का फोन भी बरामद नहीं किया गया और फोन रिकॉर्ड की उचित जांच नहीं हुई।
श्री भंडारी ने कहा कि दुष्यंत कुमार गौतम का नाम इस मामले के संबंध में सामने आया है और ऐसे समय में उन्हें सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किया गया है जब मामले की सीबीआई जांच चल रही है। उन्होंने सीबीआई से साक्ष्य मिटाने के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग करते हुए कहा कि 18 और 19 सितंबर 2022 के लिए अजय कुमार और दुष्यंत कुमार की लोकेशन तथा फोन रिकॉर्ड हासिल करने और पुलकित आर्य के पुराने फोन का डेटा निकालने के लिए डुप्लीकेट सिम जारी कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि इससे पता चल सकेगा कि घटना वाले दिन पुलकित किन लोगों के संपर्क में था।
उन्होंने कहा कि अंकिता की हत्या को लेकर पूरे उत्तराखंड में रोष है और गौतम को राज्यपाल बनाए जाने से यह रोष कई गुना बढ गया है। उन्होंने सरकार से कहा कि उसकी नियुक्ति तत्काल रद्द की जानी चाहिए। अंकिता की मां सोनी देवी ने अपनी बेटी के लिए न्याय की मांग करते हुए दुष्यंत कुमार गौतम की राज्यपाल पद पर नियुक्ति रोकने और मामले की सीबीआई जांच कराने की अपील की। उन्होंने लोगों से परिवार का समर्थन जारी रखने का आग्रह करते हुए कहा कि यह केवल उनकी बेटी की लड़ाई नहीं, बल्कि सभी की बेटियों के न्याय की लड़ाई है।
सामाजिक कार्यकर्ता और पीपल अगेंस्ट रेप इन इंडिया (पारी) की संस्थापक योगिता भयाना ने कहा कि अंकिता का परिवार कई वर्षों से न्याय के लिए संघर्ष कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले की शुरुआत से ही तथ्यों को छिपाने और किसी को बचाने के प्रयास होते रहे हैं। उन्होंने कहा कि घटना के 48 घंटे के भीतर वनंत्रा रिजॉर्ट में बुलडोजर चलाया गया, जहां अंकिता कुछ महीने से काम कर रही थीं।
