इंदौर: चोरल रेंज के जंगलों में विभिन्न परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई के मामले में हाई कोर्ट ने रोक लगा दी है. अदालत ने केंद्र और राज्य सरकार से चार सप्ताह में जवाब मांगा है. जनहित याचिका में दावा किया है कि प्रस्तावित परियोजनाओं के लिए ढाई लाख से अधिक पेड़ काटे जाने हैं और अब तक करीब 80 हजार पेड़ों की कटाई हो चुकी है.
याचिकाकर्ता करण बैरागी ने अधिवक्ता मनीष यादव और अधिवक्ता मेहुल वर्मा के माध्यम से अखबारों में प्रकाशित खबरों के आधार पर जनहित याचिका दायर की थी. याचिका पर मुख्य न्यायाधिपति अल्पेश यशवंत कोगजे और न्यायमूर्ति विनय सराफ की खंडपीठ ने सुनवाई की. याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ताओं ने दलील दी कि चोरल रेंज में इतने बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई से मालवा-निमाड़ के पर्यावरण पर गंभीर असर पड़ सकता है. इससे तापमान में वृद्धि और वर्षा में कमी की आशंका है.
जंगलों की कटाई से शेरों सहित अन्य वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास प्रभावित होने और दुर्लभ प्रजातियों के पेड़ों के विलुप्त होने का खतरा भी है. याचिका में यह तर्क भी रखा गया कि बड़े पैमाने पर पौधारोपण कर देने से पुराने जंगलों और पेड़ों की क्षति की भरपाई संभव नहीं है. इन दलीलों पर सुनवाई के बाद खंडपीठ ने पेड़ों की कटाई पर रोक लगाते हुए केंद्र और राज्य सरकार को चार सप्ताह में जवाब पेश करने के निर्देश दिए. चोरल के आरओ सचिन वर्मा ने नव भारत को बताया कि उन्हें फिलहाल मामले की जानकारी नहीं है, इसलिए वे इस पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकते.
