ओंकारेश्वर
हमारे यहां नो नाद हे जलनाद वायु नाद स्पर्श नाद आदि
जलनाद में समुद्र ,नदियों झरने हे कल कल आवाज आती हे वायु नाद में हवा की आवाज वृक्षों के पत्तों की। आवाज आंधी की आवाज
स्पर्श नाद में किसी वस्तु को स्पर्श करेंगे तो। नाद आवाज उत्पन्न होगी
आवाज का नाद में हम आवाज निकालते हे बोलते हे
मंगल भवन अमंगल हारी
दरबहु दशरथ अजर बिहारी
उमा सहित जहां जप्त पुरारी
भजन सुनाया
बारह ज्योतिर्लिंग का भजन सुनाया
हरि ऊं तट सत नमः शिवाय
ओम नमः शिवाय
भजन पर भक्त गण झूम उठे
शिव भक्त हे राम प्रभु हे
राम जपत शंभू भवानी
शिव हमेशा राम राम जपते रहते हे
मुरारीबापु ने भक्तों की मांग पर 2028 में ओंकारेश्वर में कथा सुनाने की घोषणा की
रामचरितमानस जैसा कोई ग्रंथ नहीं हे इसमें सभी ग्रंथों का समावेश हे
लौकिक रूप में में बताता हु एक पिता के दो पुत्र थे एक होशियार था दूसरा बहु सीधा था होशियार पुत्र सीधे का हमेशा शोषण करता था
दोनों ने एक भैंस पाली दोनों आधा आधा दूध बांट लेते थे
एक दिन दोनों निश्चय किया कि भेस भटवाडा कर ले
दोनों ने भेस का आधा आधा भाग कर लिया।
आगे का भाग सीधे को दिया पीछे का भाग होशियार ने लिया ।
चारा सीधा खिलाये होशियार दूध निकल ले
एक दिन सीधे ने भैंस को मुँह पर मारा भैंस ने दूध देना बंद कर दिया । तो सीधे का भगवान हे ।
ओंकारेश्वर प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग हे याह नर्मदा जी कल कल बहती हे ।
आद्य गुरु शंकराचार्य बाल्य अवस्था में ओंकारेश्वर आए थे
तपस्या में लीन गोविन्द पदचार्य को गुरु मानकर उनसे दीक्षा प्राप्त करी सन्यास ग्रहण किया 3 वर्ष तक सभी वेदों पुराणों का अध्ययन कर नर्मदाष्टक आदि स्तोत्रों को रचित किया ।
ओंकारेश्वर से रवाना होकर महिष्मति नगरी जिसेअब महेश्वर कहते में विद्वान मंडन मिश्र से शास्त्रार्थ किया विजेता हुवे मंडन मिश्र भी आद्य गुरु के साथ सनातन धर्म की रक्षा करने भ्रमण करने चल दिए देश में चार पीठ स्थापित किए
मुरारी बापू बिलम्ब से ओंकारेश्वर पंहुचे सीधे ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर के दर्शन कर ममलेश्वर मंदिर पहुंचे जलाभिषेक कर दर्शन किए । ओंकारेश्वर मंदिर में मुख्य ट्रस्टी राव पुष्पेंद्र सिंह ने अभिवादन किया
इसके बाद बापू ओंकार पर्वत पर स्थित 108 फिट ऊंचीआद्य गुरु शंकराचार्य की बाल्यावस्था स्वरूप का दर्शन किया ।
इसकेबाद अभय घाट पर विशाल पांडाल में पंहुचे ओर कथा सुनाई एवं प्रवचन के माध्यम से मनुष्य को सत मार्ग पर चलने के उपदेश दिए।
हजारों लोगों कथा का आनंद लिया ।
उल्लेखनीय हे कि मुरारी बापू दो ट्रेनों से तीर्थ यात्रा कर रहे हे कन्या कुमारी से यात्रा शुरू ही थी ओंकारेश्वर छठवां पड़ाव हे हर पड़ाव पर कथा करी ।
दोनों ट्रेनों में 900 भक्त साथ में यात्रा कर रहे हे ।खाना पीने का इंतजाम साथ में चल रहा हे ।
पंडाल म्यूजिक गायक साथ में चलते हे ।
यात्रा केदार नाथ ज्योतिर्लिंग पर 23 अक्टूबर को समाप्त होगी ।
