श्री सिंह बुधवार को यहां में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर के धन जुटाने के अभियान ‘ग्रेटर दैन अस’ की शुरुआत के अवसर पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (ए आई), स्वायत्त प्रणाली, मानवरहित प्लेटफॉर्म, उन्नत सेंसर, साइबर सुरक्षा और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी सैन्य रणनीतियों को तेजी से बदल रहे हैं। ऐसे में देश की अपनी प्रौद्योगिकी क्षमता मजबूत करना रणनीतिक रूप से बेहद जरूरी है।
श्री सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रोद्योगिकी क्षमता एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी हैं। आई आई टी जैसे संस्थान अकादमिक शोध को सेना की जरूरतों और उद्योग की मांग से जोड़कर महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री कहा कि सरकार का ‘आत्मनिर्भर भारत’ का संकल्प ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य का अहम हिस्सा है। इसका उद्देश्य भारत को प्रौद्योगिकी और ज्ञान का केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि उनका निर्माण करने वाला, नवाचार में सक्षम, आर्थिक रूप से प्रतिस्पर्धी और आत्मविश्वासी देश बनाना है।
उन्होंने उच्च शिक्षा और शोध संस्थानों को मजबूत बनाने के सरकारी प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि आई आई टी व्यवस्था ने 6,000 से अधिक स्टार्टअप, 56 यूनिकॉर्न और करीब 5,000 पेटेंट को बढ़ावा दिया है। ये उपलब्धियां दिखाती हैं कि आई आई टी अब केवल शिक्षा देने वाले संस्थान नहीं, बल्कि नवाचार, उद्यमिता और प्रोद्योगिकी क्षमता के प्रमुख केंद्र बन रहे हैं। आई आई टी कानपुर वैज्ञानिक क्षमताओं को बढ़ाने, नवाचार का माहौल मजबूत करने और समाज के लिए उपयोगी समाधान तैयार करने में अहम योगदान दे रहा है।
रक्षा मंत्री ने इस संस्थान में डी आर डी ओ उद्योग-अकादमिक उत्कृष्टता केंद्र की विशेष सराहना की और संस्थान में रक्षा तकनीक स्कूल स्थापित करने के प्रस्ताव का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि रक्षा मंत्रालय के सहयोग से संस्थान में राष्ट्रीय सैन्य ड्रोन प्रौद्योगिकी केंद्र बनाने का प्रस्ताव भी काफी आगे बढ़ चुका है और इसकी मंजूरी की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। इस केंद्र का उद्देश्य स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देना, नवाचार तेज करना और युद्धक्षेत्र में भारत की बढ़त मजबूत करना है।
उन्होंने विश्वास जताया कि ऐसे सहयोग से वैज्ञानिक प्रतिभा, संस्थानों की विशेषज्ञता और रक्षा सेनाओं का परिचालन अनुभव एक मंच पर आयेगा। इससे रणनीतिक महत्व की स्वदेशी तकनीक विकसित करने और सेना की बदलती जरूरतों के अनुरूप शोध को व्यावहारिक रक्षा समाधानों में बदलने में मदद मिलेगी।
शोध और नवाचार में लगातार निवेश की जरूरत बताते हुए रक्षा मंत्री ने सरकार की एक लाख करोड़ रुपये की अनुसंधान, विकास और नवाचार योजना का उल्लेख किया। इस योजना का उद्देश्य शोध और उन्नत तकनीकों में निजी क्षेत्र के निवेश को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि सरकार अनुकूल नीतिगत माहौल तैयार कर सकती है, शिक्षण संस्थानों को प्रतिभा और नये विचार विकसित करने होंगे, जबकि उद्योग को नवाचारों को व्यावहारिक उत्पादों में बदलकर बड़े स्तर पर पहुंचाना होगा।
आई आई टी कानपुर के ‘ग्रेटर दैन अस’ अभियान का लक्ष्य मार्च 2029 तक एक अरब डॉलर जुटाना है। यह किसी भी आई आई टी की ओर से चलाया गया अब तक का सबसे बड़ा धन संग्रह अभियान है। इसमें पूर्व छात्रों, दानदाताओं, कॉरपोरेट भागीदारों और सरकार की ओर से अब तक 4,155 करोड़ रुपये, यानी लक्ष्य का लगभग आधा हिस्सा, देने की प्रतिबद्धता जतायी जा चुकी है। इस राशि का इस्तेमाल शोध ढांचे को मजबूत करने, प्रतिभाओं को बढ़ावा देने और स्वदेशी तकनीकों व नवाचारों के विकास तथा व्यावसायीकरण में तेजी लाने के लिए किया जायेगा। इसका व्यापक उद्देश्य 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में योगदान देना है।
श्री सिंह ने भरोसा जताया कि इस अभियान से शोध क्षमता और आधुनिक सुविधाएं मजबूत होंगी, प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को नये अवसर मिलेंगे और राष्ट्रीय एवं वैश्विक चुनौतियों के समाधान विकसित किए जा सकेंगे। उन्होंने संस्थान के पूर्व छात्रों, उद्योग जगत, परोपकारी सहयोगियों और संस्थागत भागीदारों से आर्थिक सहायता, मार्गदर्शन, शोध साझेदारी और पेशेवर नेटवर्क के माध्यम से योगदान देने की अपील की।
कार्यक्रम में आई आई टी कानपुर के निदेशक प्रो. मणिंद्र अग्रवाल, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश कुमार अवस्थी तथा संस्थान के शिक्षक, विद्यार्थी और पूर्व छात्र मौजूद थे।
