श्री नेतन्याहू ने कहा कि यह योजना 10 दिन पहले उनके सामने पेश की गयी थी। उन्होंने मंगलवार को वेस्ट बैंक में दिए गए भाषण के दौरान भी फलस्तीनी प्राधिकरण के सुरक्षा बलों के इजरायल के खिलाफ होने की आशंका जतायी।
गाजा के संबंध में उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य हमास को पूरी तरह समाप्त करना है। सात अक्टूबर 2023 को हमास के नेतृत्व में हुए हमले के बाद शुरू हुए दो साल लंबे युद्ध के बावजूद उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि इजरायल इस लक्ष्य को कैसे हासिल करेगा।
एक वर्ष पहले लागू हुए युद्धविराम से बड़े पैमाने पर लड़ाई रुक गयी थी और गाजा का नियंत्रण इजरायल तथा हमास के बीच बंट गया था। रिपोर्ट के अनुसार, युद्धविराम के बाद आईडीएफ के हमलों में 1,493 फलस्तीनी मारे गए हैं।
श्री नेतन्याहू ने कहा कि वह फिलहाल जवाबी कार्रवाई की योजना लागू करने का आदेश नहीं दे रहे हैं, क्योंकि इजरायल में 27 अक्टूबर को संसदीय चुनाव होने हैं। उन्होंने कहा कि इस समय संघर्ष बढ़ने पर उन पर राजनीतिक लाभ के लिए युद्ध शुरू करने के आरोप लग सकते हैं।
इजरायल के प्रधानमंत्री ने दावा किया कि हमास और हिजबुल्लाह के साथ संघर्ष में इजरायल अपने 90 प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान आगामी चुनाव को प्रभावित करने के लिए सीधे या अपने सहयोगी संगठनों के माध्यम से इजरायल पर हमले की साजिश रच रहा है।
हमले की योजना से जुड़ी खबरों के बारे में पूछे जाने पर श्री नेतन्याहू ने कहा, ” मैं आपको बता सकता हूं कि यह सही है। वे सीधे या अपने किसी सहयोगी के माध्यम से ऐसा करना चाहते हैं।”
उन्होंने वेस्ट बैंक में भी हमले की आशंका जतायी।
श्री नेतन्याहू ने ईरान, हिजबुल्लाह, हमास, फलस्तीनी प्राधिकरण के राष्ट्रपति महमूद अब्बास और इजरायल की अरब पार्टी राम के नेता मंसूर अब्बास का उल्लेख करते हुए कहा कि ये सभी खुले तौर पर उन्हें सत्ता से हटाने की बात करते हैं।
उन्होंने दावा किया कि ऐसा इसलिए है, क्योंकि “वे इजरायल को नष्ट करना चाहते हैं। इसे रोकने के लिए हमें जीतना होगा।” इससे पहले मंगलवार को उन्होंने चुनाव से पहले इजरायल के विरोधियों को देश को चुनौती देने के खिलाफ चेतावनी दी थी। सऊदी अरब द्वारा यमन के हूती विद्रोहियों के खिलाफ लड़ाई में इजरायल से सहायता मांगे जाने संबंधी सवाल पर श्री नेतन्याहू ने कहा, “मध्य पूर्व में शायद ही कोई ऐसा देश है, जो हमसे मदद नहीं मांग रहा है।”
उन्होंने यह भी दावा किया कि इजरायल की सार्वजनिक रूप से आलोचना करने वाले पश्चिमी देश भी उससे सहायता और रक्षा प्रौद्योगिकी हासिल करने की मांग कर रहे हैं।
