जबलपुर: हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष व वरिष्ठ अधिवक्ता मृगेंद्र सिंह के वाट्सऐप खाते बंद किए जाने के मामले में मेटा ने अपनी सीधी भूमिका से पल्ला झाड़ लिया है। कंपनी की ओर से हाईकोर्ट में कहा गया कि विवाद अधिवक्ता और वाट्सऐप के बीच का है तथा इसमें मेटा की कोई भूमिका नहीं है। जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने वाट्सऐप को जवाब प्रस्तुत करने के लिए तीन दिन का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी।
याचिका के अनुसार, मृगेंद्र सिंह का प्राथमिक वाट्सऐप खाता 23 अगस्त 2026 को बंद कर दिया गया था। उनका आरोप है कि खाते पर प्रतिबंध लगाने से पहले न तो कोई सूचना दी गई और न ही इसका स्पष्ट कारण बताया गया। उन्होंने उसी दिन एप के माध्यम से समीक्षा का अनुरोध किया गया, लेकिन समाधान नहीं हुआ। पेशेवर कामकाज प्रभावित होने पर उन्होंने दूसरे मोबाइल नंबर से खाता बनाया, जिसे भी चार अक्टूबर को प्रतिबंधित कर दिया गया। याचिकाकर्ता का कहना है कि वे वाट्सऐप का उपयोग वर्षों से न्यायिक कार्य, मुकदमों के प्रबंधन, मुवक्किलों से संवाद और महत्वपूर्ण दस्तावेजों के आदान-प्रदान के लिए कर रहे थे। दोनों खाते बंद होने से उनका पेशेवर कामकाज प्रभावित हुआ है। याचिका में खाते बंद करने की कार्रवाई को संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(ह) और 21 से जुड़े अधिकारों के प्रतिकूल बताते हुए सूचना प्रौद्योगिकी नियम- 2021 के अनुपालन पर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता ने दोनों खाते बहाल करने और कथित नियम उल्लंघन पर उचित कार्रवाई के निर्देश देने की मांग की है।
