सुनील गोयल
ग्वालियर। जीएसटी नंबर किसी कारोबार की पहचान और कानूनी संचालन का आधार है, लेकिन इसके कथित दुरुपयोग से दूसरों के दस्तावेजों पर फर्में खड़ी करने, बोगस किरायानामा बनाने और फर्जी बिलिंग के जरिए राजस्व को नुकसान पहुंचाने की आशंका गंभीर सवाल खड़े करती है। नवभारत प्रतिनिधि की छानबीन से प्राप्त जानकारी के अनुसार विगत तीन वर्षों में लगभग 8,500 लोगों ने जीएसटी रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन दिया, जिनमें से लगभग 5,000 स्वीकृत हुए। शेष साढ़े तीन हजार आवेदन पहचान दस्तावेजों में विसंगति के कारण निरस्त किए गए।
नवभारत प्रतिनिधि ने कई जिम्मेदारों और जानकारों से बात की। एक टैक्स कंसल्टेंट ने बताया कि रजिस्ट्रेशन के लिए पहचान पत्र, पैन, बैंक विवरण और कारोबारी पते का प्रमाण पोर्टल पर अपलोड करना होता है, जिसमें बिजली बिल, संपत्ति दस्तावेज या किरायानामा लगाया जा सकता है। वहीं एक व्यक्ति ने स्वयं को विभागीय कर्मचारी बताते हुए कथित तौर पर कहा कि वह बिजली बिल के आधार पर रजिस्ट्रेशन दिलाने में मदद कर सकता है। तीसरे व्यक्ति ने बताया कि बिजली बिल के आधार पर बोगस किरायानामा बनाकर उसी पते पर जीएसटी नंबर के लिए आवेदन किया जाता है। नवभारत के पास इन दावों से जुड़े सबूत सुरक्षित हैं।
छानबीन में यह भी सामने आया कि बोगस फर्मों को जीएसटी दिलाने में विभागीय कर्मचारियों की संभावित मिलीभगत को नकारा नहीं जा सकता। मल्टीस्टोरी भवनों के चौकीदारों की भूमिका भी देखी गई है, जो कथित तौर पर पते और दस्तावेजों से जुड़ी जानकारी देने में सक्रिय बताए जा रहे हैं। जांच में सबसे बड़ा लीकेज जीएसटी अधिनियम की धारा 14ए से जुड़ा बताया गया। इसके अंतर्गत यदि विभागीय कर्मचारी 72 घंटे में दस्तावेजों की जांच नहीं कर पाते, तो कंप्यूटर से स्वतः जीएसटी पंजीयन नंबर आवंटित हो जाता है। वहीं जीएसटी अधिनियम मे गिरफ़्तारी का क्लॉज़ विलोपित किया गया है। आरोप है कि इसी व्यवस्था का फायदा बोगस फर्में बनाने में उठाया जा रहा है।
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विभाग को यह भी बताना होगा कि कितनी कर चोरी का आकलन हुआ, कितनी वसूली हुई और कितनी एफआईआर दर्ज हुईं। कार्रवाई केवल प्रमाणों के आधार पर होनी चाहिए, जिनके दस्तावेजों का बिना जानकारी उपयोग हुआ, उन्हें शिकायत और राहत कैसे मिलेगी, यह भी स्पष्ट होना चाहिए।
इस संबंध में वर्तमान स्टेट वाणिज्य कर विभाग में कमिश्नर अनय द्विवेदी द्वारा मोबाइल नहीं उठाने पर जानकारी नहीं मिल सकी।
