भैरूंदा। वनग्राम कोसमी में वन विकास निगम की बेदखली कार्रवाई के बाद बेघर हुए आदिवासी परिवारों को खुले आसमान के नीचे रात बितानी पड़ी. मकान टूटने और खेतों में खड़ी फसल नष्ट होने से प्रभावित परिवारों के सामने रहने और आजीविका का संकट खड़ा हो गया है. वहीं, कार्रवाई के विरोध में आदिवासियों का धरना-प्रदर्शन सोमवार को भी जारी रहा. प्रभावित परिवार कार्रवाई के विरोध में प्रदर्शन करते हुए अपने साथ हुए नुकसान और बेघर होने की पीड़ा जता रहे हैं.
गौरतलब है कि रविवार को वन विकास निगम के अमले ने कोसमी में करीब 30 एकड़ वनभूमि पर काबिज आदिवासी परिवारों के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए उनके मकान तोड़ दिए थे. इसके साथ ही खेतों में खड़ी मक्का सहित अन्य फसलों को भी नुकसान पहुंचाया गया. कार्रवाई के बाद आदिवासी परिवारों के सामने सिर छिपाने तक का संकट खड़ा हो गया.
मामले की जानकारी मिलने पर रविवार शाम केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी कोसमी पहुंचे थे. उन्होंने प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताई थी. चौहान ने धरने पर बैठकर भी कार्रवाई का विरोध जताया और पीडि़त परिवारों को न्याय दिलाने का भरोसा दिया था.
इसके बावजूद सोमवार को भी कोसमी में विरोध प्रदर्शन जारी रहने से मामला गरमा गया है. अब प्रभावित परिवारों को राहत और पुनर्वास उपलब्ध कराने के साथ ही कार्रवाई को लेकर प्रशासन की अगली पहल पर नजरें टिकी हैं. इधर देर शाम शिवराजसिंह चौहान के पुत्र कार्तिकेय चौहान भी ग्राम कोसमी पहुंचे और पीडि़त आदिवासी परिवारों को ढांढस बंधाते हुए कहा कि ऐसी विषम घड़ी में शिवराज सिंह चौहान व परिवार उनके साथ खड़ा है.
