जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने पर सीजेपी नेताओं ने जतायी नाराजगी, असहमति की आवाज दबाने का आरोप

नयी दिल्ली, 12 अक्टूबर (वार्ता) दिल्ली के अधिकृत विरोध प्रदर्शन स्थलों की सूची से जंतर-मंतर को हटाए जाने पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं ने आज तीखी आलोचना की है।

संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि यह कदम सार्वजनिक असहमति को कुचलने और लोकतांत्रिक स्वतंत्रताओं को सीमित करने के प्रयास को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक प्रदर्शन स्थल अब प्रभावी रूप से अपने मूल उद्देश्य के काम का नहीं रह गया है। उन्होंने भाजपा सरकार पर प्रदर्शनों के खिलाफ एक प्रतिकूल माहौल बनाने का आरोप लगाया। ‘एक्स’ पोस्ट में उन्होंने घोषणा की, “अब पूरा देश जंतर-मंतर बनेगा!”

एक अन्य पोस्ट में श्री दीपके ने चेतावनी दी कि इस फैसले के परिणाम प्रदर्शन के लिए जगह चुनने भर तक सीमित नहीं रहेंगे। उन्होंने लिखा, “आज श्री मोदी ने जंतर-मंतर को अधिकृत प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिया है। कल वे लोकतंत्र को ही अधिसूचना से बाहर कर देंगे।”

उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य मुद्दा विरोध प्रदर्शन की जगह नहीं, बल्कि सत्ता में बैठे लोगों से सवाल पूछने का नागरिकों का जज्बा है। उन्होंने कहा, “तानाशाह की समस्या कभी प्रदर्शन स्थल नहीं रही। उसकी समस्या तो जनता के प्रदर्शन करने का विचार ही है।”

सीजेपी के अन्य नेताओं ने भी इस फैसले पर सवाल उठाए। श्री सौरभ दास ने इसे शांतिपूर्ण ढंग से एकत्र होने के अधिकार का हनन बताया, जबकि श्री आशुतोष रांका ने अधिकारियों के घोषित वैकल्पिक स्थानों पर तंज कसा।

श्री दास ने ‘एक्स’ पर लिखा, “नरेन्द्र मोदी जंतर-मंतर से क्यों डरते हैं? जंतर-मंतर भारत के लोगों का है।” उन्होंने सवाल किया कि क्या इस बदलाव को मंजूरी देने से पहले गृह मंत्रालय ने नागरिकों, नागरिक समाज के संगठनों या अन्य हितधारकों से परामर्श किया था।

इस कदम को मनमाना बताते हुए श्री दास ने कहा कि इस प्रतिष्ठित स्थल को अधिकृत प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने से प्रदर्शन करने के मौलिक अधिकार के इस्तेमाल को लेकर चिंता पैदा होती है। उन्होंने श्री दीपके की बात दोहराते हुए लिखा, “जिस तरह वे जनता के जंतर-मंतर को हटा रहे हैं, प्रधानमंत्री जल्द ही भारत में लोकतंत्र को भी अधिसूचना से बाहर कर देंगे।”

दूसरी ओर, श्री रांका ने नये तय किये गये स्थलों की व्यावहारिकता पर सवाल उठाते हुए तंज कसा, “क्यों न माउंट एवरेस्ट को ही आधिकारिक प्रदर्शन स्थल घोषित कर दिया जाए?”

दिल्ली पुलिस के जंतर-मंतर का विरोध प्रदर्शन के लिए अधिकृत स्थल का दर्जा औपचारिक रूप से वापस लेने और रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड तथा पूर्वी दिल्ली के सीबीडी ग्राउंड को प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक स्थान घोषित करने के बाद ये आलोचनाएं सामने आयी हैं।

दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार के जारी एक आदेश के अनुसार, यह निर्णय गृह मंत्रालय की ओर से गठित उस समिति की सिफारिशों के आधार पर लिया गया है, जिसे नागरिकों के प्रदर्शन करने के लिए उपयुक्त वैकल्पिक स्थान तलाशने की जिम्मेदारी दी गयी थी।

इस बदलाव को औपचारिक रूप देने वाला स्थायी आदेश 11 अक्टूबर को जारी किया गया था। पुलिस ने कहा कि इन तीनों नये स्थानों पर प्रदर्शनों के आयोजन को नियंत्रित करने के लिए एक संशोधित और विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) अलग से जारी की जायेगी।

जंतर-मंतर दशकों से राजधानी में सार्वजनिक प्रदर्शनों का एक सबसे जाना-पहचाना केंद्र रहा है, जहां राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक मुद्दों पर धरने-प्रदर्शन होते आये हैं। इसका केंद्रीय स्थान और जन-अभियानों के साथ इसका पुराना जुड़ाव इसे उन नागरिकों और संगठनों के लिए एक प्रमुख धरना स्थल बनाता है, जो अपनी मांगों की ओर ध्यान आकर्षित कराना चाहते हैं।

यह बदलाव सीजेपी और अन्य समूहों के हाल ही में दिये गये प्रदर्शन के आह्वान के बीच तनाव के माहौल में आया है। इस वर्ष की शुरुआत में पार्टी द्वारा आयोजित एक प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर व्यवधान, हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचा था।

इसके बाद पुलिस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ पार्टी के नये प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया था।

 

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