वॉशिंगटन, 11 अक्टूबर (वार्ता) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अमेरिका और वैश्विक बाजार में रूसी डीज़ल की आपूर्ति की इजाज़त देने की योजना की रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों ने आलोचना की है।
गौरतलब है कि इससे मॉस्को पर दबाव कम करने को लेकर उनकी पार्टी में मतभेद सामने आए हैं, जबकि प्रशासन ईरान युद्ध से जुड़ी ईंधन की बढ़ती कीमतों से जूझ रहा है। रिपब्लिकन सांसदों ने रूसी ईंधन आयात करने के फ़ैसले पर सवाल उठाए हैं, जबकि अन्य लोगों ने श्री ट्रंप के इस सुझाव का विरोध किया है कि यूक्रेन को एक नये राष्ट्रपति की ज़रूरत है।
डेमोक्रेट्स ने राष्ट्रपति पर आरोप लगाया है कि वे ऊर्जा की कीमतों को नियंत्रित करने और ईरान के साथ संघर्ष से घरेलू राजनीतिक असर को सीमित करने की कोशिश में यूक्रेन के ख़िलाफ़ रूस के युद्ध का वित्त पोषण में मदद कर रहे हैं।
लुइसियाना के रिपब्लिकन सीनेटर जॉन कैनेडी ने ईंधन की कीमतें कम करने की श्री ट्रंप की कोशिशों का समर्थन किया लेकिन रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से डीज़ल लेने का विरोध किया। श्री कैनेडी ने कहा, “मैं श्री पुतिन से इसे आयात करने के उनके फ़ैसले का समर्थन नहीं करता। ”
उन्होंने कहा, “वे कभी हमारे दोस्त नहीं बनेंगे।” उन्होंने तर्क दिया कि ईरान में युद्ध खत्म होने से डीज़ल की कीमतें कम करने में अधिक मदद मिलेगी।
मिशिगन के रिपब्लिकन और सीनेट की खाली सीट के लिए चुनाव लड़ रहे पूर्व प्रतिनिधि माइक रोजर्स ने भी रूसी ईंधन आयात करने का विरोध किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने फ़सल कटाई के मौसम में किसानों के लिए लागत कम करने के वास्ते ईंधन निर्यात पर अस्थायी रोक लगाने की मांग की थी।
श्री ट्रंप ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर इस समझौते की घोषणा की। उन्होंने कहा कि रूस तुरंत अमेरिका और वैश्विक बाजार को 300,000 टन से अधिक डीज़ल ईंधन की आपूर्ति करेगा, इसके बाद नवंबर में 500,000 टन और उसके बाद दस लाख टन की आपूर्ति होगी।
गौरतलब है कि यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब प्रशासन ईरान के ख़िलाफ़ अमेरिकी सैन्य अभियानों और रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच ऊर्जा की कीमतों को लेकर दबाव का सामना कर रहा है। नवंबर में होने वाले कांग्रेस चुनावों से पहले बढ़ती जीवन-यापन की लागत भी रिपब्लिकन के लिए राजनीतिक चिंता का विषय बन गई है। पेन्सिलवेनिया के रिपब्लिकन प्रतिनिधि ब्रायन फिट्ज़पैट्रिक ने शनिवार को एक द्विदलीय विधेयक, ‘रोनाल्ड रीगन पीस थ्रू स्ट्रेंथ एक्ट’ पेश किया। उन्होंने कहा कि यह विधेयक श्री ट्रंप को रूस पर लगे प्रतिबंध हटाने से रोकेगा। नेब्रास्का के प्रतिनिधि डॉन बेकन ने इसे सह-प्रायोजित करने के लिए हस्ताक्षर किए हैं, हालांकि डेमोक्रेटिक प्रायोजक कौन है, यह तुरंत स्पष्ट नहीं हो सका।
श्री ट्रंप ने सितंबर में इस कानून पर हस्ताक्षर किए थे। इसमें रूसी ऊर्जा के प्रमुख खरीदारों या मॉस्को को प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का प्रावधान है। अलास्का की सीनेटर लिसा मुर्कोव्स्की ने भी श्री ट्रंप से आग्रह किया कि वे रूस को अपनी ऊर्जा से होने वाली आय बढ़ाने देने की बजाय उन शक्तियों का उपयोग करें। श्री मुर्कोव्स्की ने सोशल मीडिया पर लिखा, “श्री ट्रंप को उन अधिकारों का उपयोग करना चाहिए, न कि रूस को डीजल निर्यात करने, भारी राजस्व कमाने और यूक्रेन में अपना विनाशकारी युद्ध जारी रखने की अनुमति देनी चाहिए।”
उन्होंने कहा, “युद्ध खत्म होने के बाद हम वैश्विक ऊर्जा बाजारों में रूस की वापसी पर चर्चा कर सकते हैं लेकिन इस बीच हमें उन सभी चीजों को रोकना होगा जो इसे बढ़ावा दे रही हैं।”
डेमोक्रेट्स ने और भी कड़े शब्दों में आलोचना की और श्री ट्रंप पर आरोप लगाया कि उन्होंने ईरान के खिलाफ अपने सैन्य अभियान के आर्थिक परिणामों से निपटने के लिए मॉस्को पर अमेरिकी दबाव को कम कर दिया है। न्यूयॉर्क के सीनेट में अल्पसंख्यकों के नेता चक शूमर ने इस समझौते को ‘शैतान के साथ सौदा’ करार दिया, जिसका मकसद श्री ट्रंप की ‘डगमगाती राजनीतिक किस्मत’ को बचाना है।
श्री शूमर ने सोशल मीडिया पर लिखा, “यह घटिया समझौता श्री पुतिन की मदद करेगा जो ईरानियों को पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाने और उन्हें मारने की कोशिश में मदद कर रहे हैं और जिन्होंने गैर-कानूनी और बेरहमी से हमारे सहयोगी यूक्रेन पर हमला किया था।” संयुक्त आर्थिक समिति में सदन के वरिष्ठ डेमोक्रेट और वर्जीनिया के प्रतिनिधि डॉन बेयर ने इस कदम को ‘गुस्सा दिलाने वाला’ बताया और कहा कि इससे रूस के प्रति प्रशासन के रवैये को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं।
