
उज्जैन। सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत शहर में सडक़ चौड़ीकरण सहित विभिन्न विकास कार्यों को गति दी जा रही है। करीब 30 हजार करोड़ रुपए के निर्माण एवं विकास कार्यों के बीच अब महाकाल चौराहे से गुदरी होते हुए गोपाल मंदिर तक सडक़ चौड़ीकरण की कार्रवाई ने जोर पकड़ लिया है। शनिवार और रविवार की दरमियानी रात करीब 1 बजे संबंधित क्षेत्र में नपती कर सडक़ चौड़ीकरण के लिए मार्किंग की गई। यहां सडक़ को 65 फीट चौड़ा करने के उद्देश्य से दोनों ओर 4-4 मीटर के निशान लगाए गए हैं। रात में हुई इस कार्रवाई की जानकारी मिलते ही क्षेत्र के व्यापारियों में हडक़ंप मच गया। चौड़ीकरण की जद में आने वाले व्यापारियों और रहवासियों के सामने अब अपनी दुकानों और मकानों को लेकर चिंता खड़ी हो गई है।
महाकाल चौराहे से गुदरी और गोपाल मंदिर तक का मार्ग धार्मिक, व्यावसायिक और यातायात की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। सिंहस्थ के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के उज्जैन पहुंचने की संभावना को देखते हुए इस मार्ग को चौड़ा करने की योजना पर काम किया जा रहा है। इसी क्रम में शनिवार-रविवार की दरमियानी रात करीब 1 बजे नपती की गई और सडक़ के दोनों ओर निशान लगाए गए। सडक़ को 65 फीट चौड़ा करने के लिए की गई इस मार्किंग की खबर क्षेत्र में फैलते ही व्यापारियों के बीच हलचल बढ़ गई। व्यापारियों को आशंका है कि चौड़ीकरण की निर्धारित सीमा में आने से उनके प्रतिष्ठानों का बड़ा हिस्सा प्रभावित होगा। उनका कहना है कि क्षेत्र के लगभग 70 प्रतिशत व्यापारियों के पटिए से संचालित प्रतिष्ठान चौड़ीकरण की चपेट में आकर पूरी तरह समाप्त हो सकते हैं। हालांकि, प्रभावित प्रतिष्ठानों की वास्तविक संख्या और नुकसान का आकलन विस्तृत सर्वे के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। पटनी बाजार, गुदरी और गोपाल मंदिर क्षेत्र उज्जैन के प्रमुख धार्मिक एवं व्यावसायिक इलाकों में शामिल हैं। यहां से बाबा महाकाल की सवारी निकलती है। गोपाल मंदिर क्षेत्र में धार्मिक आयोजन होते हैं, वहीं विभिन्न रैलियों, जुलूसों और अन्य यात्राओं के दौरान भी इस मार्ग का उपयोग किया जाता है। ऐसे में सडक़ की चौड़ाई और यातायात व्यवस्था का सीधा संबंध धार्मिक आयोजनों के सुचारु संचालन से भी है। रात में मार्किंग किए जाने के बाद अब संबंधित व्यापारियों और रहवासियों को नोटिस दिए जाने की बात सामने आ रही है। नोटिस मिलने के बाद चौड़ीकरण की सीमा और प्रभावित निर्माणों को लेकर स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है। इसके बाद मुआवजे, निर्माण हटाने की प्रक्रिया और प्रभावित लोगों को मिलने वाली राहत जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण होंगे। हालांकि, मुआवजे की दर, पात्रता और प्रक्रिया को लेकर अभी आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।
व्यापारियों की फिर बढ़ी चिंता-विरोध और आमरण अनशन के संकेत
चौड़ीकरण को लेकर पिछले दिनों टेंडर जारी होने के बाद क्षेत्रीय व्यापारियों में नाराजगी सामने आई थी। व्यापारियों के विरोध को देखते हुए स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने उनसे मुलाकात कर बीच का रास्ता निकालने का आश्वासन दिया था। इससे व्यापारियों को उम्मीद थी कि उनकी दुकानों और कारोबार को बचाने के लिए कोई समाधान निकाला जा सकता है। लेकिन रात में नपती कर निशान लगाए जाने के बाद एक बार फिर असमंजस की स्थिति बन गई है। व्यापारियों के सामने अब यह सवाल है कि चौड़ीकरण की अंतिम सीमा क्या होगी, कितने प्रतिष्ठान प्रभावित होंगे और प्रभावित लोगों को किस प्रकार राहत दी जाएगी। मार्किंग के बाद प्रभावित व्यापारियों में नाराजगी बढ़ गई है। व्यापारियों ने चौड़ीकरण के विरोध में प्रदर्शन करने और जरूरत पडऩे पर आमरण अनशन शुरू करने के संकेत दिए हैं। उनका कहना है कि बाजार में लंबे समय से व्यापार संचालित हो रहा है और कई परिवारों की आजीविका इन्हीं दुकानों पर निर्भर है। ऐसे में यदि प्रतिष्ठान पूरी तरह प्रभावित होते हैं तो उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो सकता है।
सुगम आवाजाही के लिए चौड़ीकरण-दीपावली से पहले कारोबार की चिंता
उज्जैन में सिंहस्थ 2028 को देखते हुए बड़े पैमाने पर आधारभूत सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। शहर की आंतरिक सडक़ों को चौड़ा करने के साथ विभिन्न स्थानों पर पुल और एलिवेटेड ब्रिज सहित यातायात से जुड़े निर्माण कार्य किए जा रहे हैं। इन कार्यों का उद्देश्य सिंहस्थ के दौरान श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुगम बनाना, भीड़ का दबाव कम करना और यातायात जाम की स्थिति से बचना है। महाकाल मंदिर की ओर जाने वाले मार्गों से लेकर शिप्रा नदी के घाटों और साधु-संतों के पड़ाव क्षेत्रों तक पहुंचने वाले रास्तों को बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है। चौड़ीकरण की कार्रवाई ऐसे समय सामने आई है, जब दीपावली का त्योहार नजदीक है। व्यापारियों के लिए यह अवधि कारोबार की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती है। बाजार में ग्राहकों की आवाजाही बढऩे की उम्मीद रहती है और इसी के अनुरूप व्यापारी अपनी तैयारियां करते हैं। व्यापारियों को डर है कि यदि त्योहार के समय निर्माण कार्यों के कारण बाजार की गतिविधियां प्रभावित हुईं तो उनके कारोबार पर असर पड़ सकता है।
