नयी दिल्ली, 10 अक्टूबर (वार्ता) कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने कहा कि आर्थिक विकास एवं सामाजिक विकास को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता, विशेष तौर पर प्राकृतिक संसाधनों और स्थानीय समुदायों के साथ नजदीकी से जुड़े क्षेत्रों में।
कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के अंतर्गत यहां 6-7 अक्टूबर को भारतीय कॉर्पोरेट कार्य संस्थान द्वारा आयोजित कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) पर तीसरे राष्ट्रीय सम्मेलन एवं प्रदर्शनी के उद्घाटन के मौके पर श्री दुबे ने राष्ट्रीय आर्थिक विकास, क्षेत्रीय विकास और संसाधन-समृद्ध क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों के कल्याण के बीच घनिष्ठ संबंध पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आर्थिक प्रगति का वास्तविक अर्थ तभी पूर्ण होता है, जब इसके लाभ “सशक्त समुदायों, व्यापक अवसरों और अधिक सुदृढ़ क्षेत्रों” के रूप में दिखायी दें।
केंद्रीय मंत्री ने जोर देकर कहा कि प्राकृतिक संसाधनों और स्थानीय समुदायों से निकटता से जुड़े क्षेत्रों में आर्थिक विकास और सामाजिक विकास को अलग-अलग उद्देश्यों के रूप में नहीं देखा जा सकता।
इस अवसर पर उन्होंने भारतीय कोयला कंपनियों के लिए व्यापक सीएसआर रूपरेखा का औपचारिक रूप से विमोचन किया। यह रूपरेखा कोयला क्षेत्र में अधिक व्यवस्थित, आवश्यकता-आधारित और परिणामोन्मुख कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व पहलों को दिशा प्रदान करने के उद्देश्य से तैयार की गई है। इस दो दिवसीय सम्मेलन का विषय था- “विकसित भारत के लिए सीएसआर की भावना में बदलाव: अनुपालन से प्रतिबद्धता तक”।
उद्घाटन सत्र के दौरान इंडिया सीएसआर फैक्टबुक 2024-25 का भी विमोचन किया गया, जो भारत में सीएसआर के बदलते परिदृश्य के संबंध में समेकित जानकारी उपलब्ध कराती है। इस सत्र में कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय की सचिव डॉ. पल्लवी जैन गोविल, भारत में संयुक्त राष्ट्र महिला (यूएन वूमेन) की प्रतिनिधि शोको इशिकावा, भारतीय कॉर्पोरेट कार्य संस्थान (आईआईसीए) के महानिदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी ज्ञानेश्वर कुमार सिंह तथा आईआईसीए के स्कूल ऑफ बिजनेस एनवायरनमेंट की प्रमुख प्रोफेसर गरिमा दधीच भी मौजूद थीं।
कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय की सचिव पल्लवी जैन गोविल ने सीएसआर को देश के व्यापक कॉर्पोरेट प्रशासन और राष्ट्रीय विकास के ढांचे के संदर्भ में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि एनसीसीएसआर 2026 की विषय वस्तु सभी हितधारकों से “वार्षिक दायित्व से आगे बढ़कर देखने” और देश की विकास यात्रा में जिम्मेदार उद्यमों के व्यापक योगदान पर विचार करने का आह्वान करती है।
