अदन, 10 अक्टूबर (वार्ता) सऊदी-नेतृत्व वाली गठबंधन सेनाओं ने हूतियों के तीन रॉकेट लॉन्चिंग प्लेटफॉर्म नष्ट कर दिए हैं।
यह कार्रवाई यमन के पश्चिमी लाल सागर तट और रणनीतिक बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के पास बढ़ती लड़ाई के बीच की गई है। गठबंधन प्रवक्ता तुर्की अल-मलिकी ने शनिवार को कहा, “हमने हूती मिलिशिया द्वारा क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे तीन रॉकेट लॉन्चिंग प्लेटफॉर्म नष्ट कर दिए।” उन्होंने कहा कि नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमलों का कड़ाई से जवाब दिया जाएगा।
गौरतलब है कि ये अभियान सऊदी अरब और यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के बीच सैन्य सहयोग को उजागर करते हैं। यह सहयोग क्षेत्रीय सुरक्षा और बाब अल-मंदेब (लाल सागर और अदन की खाड़ी को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग) से जहाजों की आवाजाही की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच हो रहा है।
सैन्य सूत्रों का हवाला देते हुए कहा गया है कि यमनी सरकारी बलों ने इलाके को खाली कराने के बाद बाब अल-मंदेब क्षेत्र और मायून द्वीप पर भी नियंत्रण कर लिया है। इस बीच सऊदी अरब ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से स्पष्ट रूप से कहा कि वह यमन को ‘अपने क्षेत्र पर हमलों या समुद्री आवाजाही के लिए खतरों का अड्डा’ नहीं बनने देगा।
संयुक्त राष्ट्र में सऊदी अरब के स्थायी प्रतिनिधि अब्दुलअजीज अलवासिल ने परिषद की एक आपातकालीन बैठक में कहा, “किंगडम इस बात की पुष्टि करता है कि वह यमन को अपनी सुरक्षा या लाल सागर और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य में आवाजाही की स्वतंत्रता के लिए खतरों का केंद्र नहीं बनने देगा।”
श्री अलवासिल ने यमन में राजनीतिक समाधान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए अपनी संप्रभुता और नागरिकों की रक्षा करने के रियाद के अधिकार पर जोर दिया। उन्होंने हूतियों पर कूटनीतिक पहलों को ठुकराकर सैन्य तनाव बढ़ाने का आरोप लगाया और सुरक्षा परिषद से संबंधित प्रस्तावों, जिसमें समूह पर हथियारों की पाबंदी को लागू करने का आग्रह किया।
उनकी यह टिप्पणी गुरुवार को रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए हमलों के बाद आई है, जिसमें सऊदी हवाई कंपनी के पायलट कैप्टन हमौद बिन अली अल-कलथामी सहित तीन सऊदी नागरिकों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए।
सऊदी विमानन अधिकारियों ने कहा कि हमलों में हवाई अड्डे की सुविधाओं और राष्ट्रीय हवाई कंपनी के एक विमान को निशाना बनाया गया, जिससे नुकसान हुआ और उड़ानें बाधित हुईं। घायलों में कई राष्ट्रीयताओं के लोग शामिल थे। सऊदी अधिकारियों ने हाल के सप्ताहों में रियाद, आभा, खमीस मुशायत, जाज़ान और नज्रान को निशाना बनाकर किए गए कई हूथी हमलों का भी ज़िक्र किया है।
इससे पहले 15 सितंबर को मक्का पर हमले की कोशिश और 29 सितंबर को मदीना में तैबा बिजली वितरण स्टेशन पर हमला भी हुआ था। श्री अलवासिल ने चेतावनी दी कि हूथी गतिविधियों से सऊदी सुरक्षा के साथ-साथ वाणिज्यिक जहाजरानी, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को भी खतरा है। उन्होंने यह भी कहा कि बाहरी सैन्य और तकनीकी मदद ने इस समूह की क्षमताओं को मज़बूत किया है, जिससे यमन और पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ी है।
सऊदी अरब ने बार-बार यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार और राज्य के अधिकार को बहाल करने की कोशिशों का समर्थन किया है। उसका कहना है कि किसी भी स्थायी समझौते में देश की संप्रभुता, एकता और क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखना ज़रूरी है। श्री अलवासिल ने बताया कि 2012 और 2026 के बीच यमन को दी गई सऊदी आर्थिक और विकास सहायता 12.6 अरब डॉलर से अधिक रही, इसके अलावा 4.5 अरब डॉलर से अधिक की मानवीय सहायता भी दी गई। उन्होंने कहा कि किंगडम ने 4 अक्टूबर को 224 मिलियन सऊदी रियाल (59.7 मिलियन डॉलर) से अधिक की बजट सहायता भी दी।

