
जबलपुर। उत्तराखंड स्थित पिंडारी ग्लेशियर के 12,600 फीट ऊंचे जीरो पॉइंट तक पहुंचकर जबलपुर रेल मंडल के दो कर्मचारियों ने तिरंगा फहराकर साहस और जज्बे की मिसाल पेश की। मंडल की वाणिज्य शाखा में पदस्थ मुख्य वाणिज्य निरीक्षक सूर्य प्रकाश खरे और शैलेन्द्र उइके ने दुर्गम पर्वतीय ट्रेक पूरा कर रेलवे के पर्वतारोहियों के रूप में यह उपलब्धि हासिल की। दोनों ने जबलपुर से रेल मार्ग से हल्द्वानी होते हुए भीमताल, अल्मोड़ा, बागेश्वर और खाती गांव तक पहुंचने के बाद करीब 56 किलोमीटर का कठिन ट्रेक पूरा किया। खाती से फुरकिया गांव होते हुए जीरो पॉइंट तक के सफर में घने जंगल, जलधाराओं और बर्फ से ढकी पर्वत श्रृंखलाओं के बीच उन्होंने चार रातें टेंट और ट्रेकर्स हट में बिताईं। इस अभियान में मध्य रेल मुंबई और पश्चिम रेल मुंबई सेंट्रल के सदस्य भी शामिल रहे।यात्रा के दौरान करीब छह दिनों तक मोबाइल नेटवर्क से पूरी तरह दूर रहकर दोनों पर्वतारोहियों ने हिमालय की शांत वादियों, बर्फीली हवाओं और तारों से भरे आसमान के बीच प्रकृति के साथ समय बिताने का अनूठा अनुभव हासिल किया। पिंडारी ग्लेशियर कुमाऊं हिमालय के प्रमुख हिमनदों में शामिल है और यहीं से निकलने वाली पिंडर नदी आगे कर्णप्रयाग में अलकनंदा से मिलती है। यात्रा पूरी कर लौटने पर वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक शशांक गुप्ता, सहायक वाणिज्य प्रबंधक गुन्नार सिंह सहित वाणिज्य शाखा के अधिकारियों-कर्मचारियों ने सूर्य प्रकाश खरे और शैलेन्द्र उइके का स्वागत कर उन्हें सफल अभियान की बधाई दी। दोनों ने बताया कि अब एक अन्य हिम शिखर पर ट्रेकिंग की योजना बनाई जा रही है, जिसमें रेलवे का बड़ा दल शामिल होगा।
