सतना: रैंगाव में प्रस्तावित सीमेंट प्लांट के लिए भूमि अधिग्रहण के ख़िलाफ़ किसानों ने ट्रैक्टर रैली निकाल कर किया कलेक्ट्रेट का घेराव. लीज के प्रस्ताव पर पुनर्विचार कर लीज निरस्त किए जाने मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन।रैंगाव क्षेत्र में सीमेंट प्लांट के लिए प्रस्तावित लाइम स्टोन लीज को लेकर किसानों में भारी आक्रोश है. क्षेत्र के हजारों किसानों ने प्रस्तावित लीज के विरोध में मौहारी टोल प्लाज़ा के पास एकत्र होकर सैकड़ों ट्रैक्टर के माध्यम से विशाल ट्रैक्टर रैली निकाल कर कलेक्ट्रेट का घेराव किया. प्रदर्शनकारी किसानों का कहना था की पीढ़ियों से वह कृषि कार्य से जुड़े हुए हैं.
कृषि उनकी आजीविका का सब से बड़ा माध्यम है और जिस क्षेत्र में लीज प्रस्तावित की गई है वह खेती के लिए सब से उपजाऊ भूमि हैं. वर्षों प्रतीक्षा के बाद सरकार ने उनके खेतों में नहरों का जाल बिछाया है. ऐसे में अब जब किसानों को खेती के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा तब उनकी उपजाऊ भूमि सीमेंट कंपनी को लीज में देने का प्रस्ताव है. लेकिन किसान अपनी कृषि योग्य उपजाऊ भूमि किसी भी कीमत पर सीमेंट प्लांट या खनन परियोजना के लिए नहीं देना चाहता. उनका यह निर्णय जनचौपाल लगा कर क्षेत्र के सभी किसानों की सहमति से लिया गया है. इसलिए उनकी मांग है कि भूमि अधिग्रहण की किसी भी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से पहले प्रशासन किसानों की आपत्तियों और पक्ष को गंभीरता से सुने और तत्काल प्रभाव से लीज की प्रक्रिया पर रोक लगाए।
घंटों चला प्रदर्शन सभी दल रहे एक साथ
मौहारी टोल प्लाज़ा में एकत्र हो कर किसानों की ट्रैक्टर रैली दोपहर कलक्ट्रेट परिसर पहुंची जिसके कई घटों बाद किसनों का प्रतिनिधि मंडल देर शाम कलेक्ट्रेट सभागार में कलेक्ट्रेट डॉ सतीश एस से मुलाक़ात कर अपना पक्ष रखा. इस दौरान पूरा राजस्व अमला और किसान मोर्चे के सभी दलों के साथ- साथ सत्ता और विपक्ष के लोग भी सामिल रहे
कलेक्टर ने निरस्त की जनसुनवाई
किसानों के साथ चली लंबी बातचीत के बाद कलेक्टर डॉ. सतीश एस ने क्षेत्र के किसानों से लीज निरस्त किए जाने के पक्ष में दिए गए तथ्यों के आधार पर 17 अक्टूबर को आयोजित होने वाली सीमेंट कंपनी की जनसुनवाई को रद्द कर दिया है कलेक्टर ने किसानों द्वारा दिए गए मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन और उनकी मांगों के पत्र को राज्य सरकार को भेजने का भी आश्वासन दिया है
कई गांवों के किसान हुए शामिल
इस विशाल ट्रैक्टर रैली में वसुधा, रजद्वारा, महकोना, सप्ती, नौबस्ता, कोलाड, हिलौंधा, डाम्हा और छींदा सहित आसपास के कई गांवों के किसान शामिल हुए। किसानों का स्पष्ट कहना है कि यदि यह लीज दी जाती है, तो इससे उनकी उपजाऊ कृषि भूमि नष्ट हो जाएगी, जो उनके और उनके परिवार के जीवन-यापन का एकमात्र जरिया है।
