भारत में पांच साल में तीन करोड़ यूरो निवेश करेगी प्रीकास्ट कॉन्क्रीट कंपनी एलिमैटिक

नयी दिल्ली, 06 अक्टूबर (वार्ता) प्रीफैब्रिकेशन निर्माण समाधान के क्षेत्र में काम करने वाली फिनलैंड की कंपनी एलिमैटिक भारत में अपना कारोबार बढ़ाने के लिए अगले पांच साल में तीन करोड़ यूरो के निवेश की योजना बना रही है। एलिमैटिक के निदेशक मंडल के अध्यक्ष काई-पेटेरी पुरहोनेन ने यहां मंगलवार को एक मीडिया ब्रीफिंग से इतर समाचार एजेंसी ‘यूनीवार्ता’ को बताया कि कंपनी ने साल 2008 में एलिमैटिक इंडिया की स्थापना के बाद पिछले 18 साल में भारत में एक करोड़ यूरो का निवेश किया है। इसमें अधिकतर निवेश पिछले चार-पांच साल में हुआ है। उसकी योजना अगले पांच साल में तीन करोड़ यूरो (करीब 325 करोड़ रुपये) के निवेश की है।

कंपनी की अभी राजस्थान के अलवर में एकमात्र फैक्ट्री है जिसमें प्रीफैब्रिकेशन निर्माण के लिए प्रीकास्ट कॉन्क्रीट और दूसरे उत्पाद बनाए जाते हैं। लगभग 100 देशों में 4,500 परियोजनाओं पर काम कर चुकी कंपनी की वैश्विक बिक्री में 30 प्रतिशत योगदान भारतीय बाजार का है। इसके बावजूद कंपनी भारत में प्रीकास्ट निर्माण में बड़े अवसर देख रही है क्योंकि देश में होने वाले मात्र एक प्रतिशत निर्माण में ही इस तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है।

श्री पुरहोनेन ने बताया कि अभी कंपनी इस बात पर विचार कर रही है कि अलवर की फैक्ट्री में ही क्षमता विस्तार किया जाए या कहीं और दूसरी फैक्ट्री लगाई जाए। विशेषकर, मुंबई से बहुत मांग आ रही है, इसलिए आसपास के इलाके में ही फैक्ट्री लगाने पर भी विचार चल रहा है। उल्लेखनीय है कि एलिमैटिक इंडिया ने अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स लिमिटेड के नवी मुंबई हवाई अड्डे के टर्मिनल निर्माण में भी योगदान दिया है। वह एलएंडटी के लिए धारावी में झुग्गी के स्थान पर फ्लैट निर्माण के पहले चरण में भी प्रौद्योगिकी प्रदान कर रही है। दिल्ली विकास प्राधिकरण की नरेला परियोजना में भी कंपनी के प्रीफैब्रिकेशन का इस्तेमाल किया गया है। जिंदल स्टील पिछले 15 साल से अपनी परियोजनाओं के लिए एलिमैटिक के साथ काम कर रही है। पीएसपी और गौड़ समूह भी इस प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल कर रहा है।

जिंदल स्टील ने फिनलैंड की कंपनी वकिओ ग्लोबल के साथ मिलकर वकिओ जिंदल के नाम से एक संयुक्त उपक्रम भी स्थापित किया है। यह कंपनी तैयार बाथरूम बनाती है जो एलिमैटिक द्वारा बनाई गई इमारतों में लगाए जाते हैं। ये बाथरूम पूरी तरह से तैयार होते हैं। इसमें टाइल, बिजली और पानी के पाइप का काम पहले से किया होता है।
मीडिया ब्रीफिंग के दौरान एलिमैटिक से मुख्य कार्यकारी अधिकारी टेप्पो वोटिलाइनेन ने कहा कि भारत में निर्माण क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है। साथ ही यहां चुनौतियां भी बहुत हैं।
भारत में प्रीकास्ट प्रौद्योगिकी अपनाकर लागत 10 प्रतिशत कम की जा सकती है। इससे श्रम की जरूरत 60 प्रतिशत और निर्माण में लगने वाला समय 50 प्रतिशत कम हो जाएगा।

उन्होंने कहा कि भारतीय आर्किटेक्ट सबसे हटकर बेहतरीन डिजाइन तैयार करना चाहते हैं जो बेहद खूबसूरत दिखते हैं, लेकिन उनके लिए प्रीकास्ट तैयार करना मुश्किल है। इसलिए प्रीकास्ट के इस्तेमाल की स्वीकार्यता बढ़ाना जरूरी है। एलिमैटिक इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी किशन कुमार मेहरोत्रा ने कहा कि भारत में अभी इस क्षेत्र में विकास की काफी संभावनाएं हैं। यदि देश की अर्थव्यवस्था को 10 लाख करोड़ डॉलर तक ले जाना है तो उसके लिए बड़े पैमाने पर निर्माण की जरूरत होगी। देश में उस अनुपात में कौशल प्राप्त मानव संसाधन की उपलब्धता नहीं है। इसलिए भी प्रीकास्ट निर्माण की ओर बढ़ने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि फिनलैंड में 95 प्रतिशत निर्माण में प्रीकास्ट प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जाता है। भारत में वह स्थिति हासिल करने के लिए प्रीकास्ट कॉन्क्रीट बनाने वाली कम से कम 4,000 कंपनियों की जरूरत होगी।

.....

Next Post

नवी मुंबई हवाई अड्डे के टर्मिनल पर ही यात्रियों के लिए खुला होटल

Tue Oct 6 , 2026
मुंबई, 06 अक्टूबर (वार्ता) अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स ने नवी मुंबई हवाई अड्डे के टर्मिनल-1 पर स्वर्ल ट्रांजिट होटल शुरू करने की घोषणा की जिससे विशेष रूप से ट्रांजिट यात्रियों को काफी सुविधा होगी। अडानी एयरपोर्ट्स ने मंगलवार को बताया कि स्वर्ल ट्रांजिट होटल में 80 कमरे उपलब्ध हैं। यात्री चार […]

You May Like