नई दिल्ली, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और चीफ इलेक्शन कमिश्नर (CEC) ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने की मांग को लेकर देश का राजनीतिक माहौल गरमा गया है। इसके विरोध में I.N.D.I.A. गठबंधन के तमाम विपक्षी सांसदों ने संसद भवन परिसर मेंजमा होकर जोरदार नारेबाजी की और इसके बाद चुनाव आयोग के मुख्यालय की तरफ एक बड़े मार्च की शुरुआत की। विपक्षी दलों का आरोप है कि चुनाव आयोग के भीतर चल रही अंदरूनी कलह और वोटर लिस्ट से जुड़े मामलों में पारदर्शिता की कमी के कारण देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मध्य दिल्ली में बढ़ाई गई सुरक्षा व्यवस्था, विपक्षी नेताओं के आक्रामक तेवर से गरमाई राष्ट्रीय राजधानी की सियासत
विपक्ष के इस प्रस्तावित मार्च और प्रदर्शन को देखते हुए आज सुबह से ही सेंट्रल दिल्ली और चुनाव आयोग के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत कई बड़े विपक्षी नेता इस विरोध प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे हैं। हाल ही में एक प्रतिष्ठित अखबार में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और एसआईआर प्रक्रिया को लेकर हुए खुलासों के बाद से पूरा विपक्ष हमलावर मुद्रा में आ गया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि नागरिकों के मतदान के अधिकार को कमजोर करने वाले किसी भी कदम को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और वे इस मुद्दे को देशव्यापी स्तर पर उठाएंगे।
लोकतंत्र और संविधान की रक्षा का संकल्प, चुनाव आयोग से निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की पुरजोर मांग
संसद से लेकर सड़क तक गूंज रहे इन नारों के बीच विपक्षी दलों ने साफ कर दिया है कि जब तक चुनाव आयोग पूरी तरह से पारदर्शी तरीके से काम करने का भरोसा नहीं दिलाता, तब तक उनका यह विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों द्वारा हाल ही में दिए गए बياनों और विपक्ष के इस राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन से आगामी राजनीतिक हालात काफी दिलचस्प हो गए हैं। सरकार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे इन गंभीर सवालों के बाद देश की जनता की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि इस गतिरोध को दूर करने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

