
भोपाल: शाहपुरा तालाब के संरक्षण और अतिक्रमण हटाने के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने प्रशासन को 10 दिन में तालाब की वास्तविक सीमा तय करने के निर्देश दिए हैं. एसडीएम कोलार, जल संसाधन विभाग और भोपाल नगर निगम को संबंधित समिति के साथ मिलकर तालाब का फुल टैंक लेवल (एफटीएल) और 50 मीटर बफर जोन चिन्हित करना होगा. एनजीटी ने कहा कि सीमा तय होने के बाद तालाब के कैचमेंट और 50 मीटर बफर क्षेत्र में मौजूद अवैध और अस्थायी निर्माणों को हटाने की कार्रवाई शुरू की जाए. अधिकरण ने विभागों के बीच जिम्मेदारी को लेकर चल रही खींचतान पर भी नाराजगी जताई और स्पष्ट निर्देश दिए कि आपसी समन्वय से काम किया जाए. इस मामले की अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को होगी. इस दौरान प्रशासन को अब तक की कार्रवाई की एक्शन टेकन रिपोर्ट पेश करनी होगी.
-ड्रोन सर्वे में मिले कई निर्माण
शाहपुरा तालाब क्षेत्र का 24 जुलाई को ड्रोन सर्वे कराया गया था. इसमें कैचमेंट क्षेत्र में कई स्थायी और अस्थायी निर्माण तथा अतिक्रमण चिन्हित किए गए हैं. अब इन स्थानों पर कार्रवाई से पहले तालाब की एफटीएल और बफर जोन की सीमा स्पष्ट की जाएगी.
-एसडीएम कोलार को पूरी तैयारी के साथ आने के निर्देश
सुनवाई के दौरान पूरी जानकारी के साथ उपस्थित नहीं होने पर एनजीटी ने एसडीएम कोलार पीसी पांडे को निर्देश दिए कि अगली बार मामले की पूरी तैयारी के साथ उपस्थित हों. नगर निगम की ओर से विस्तृत जवाब पेश नहीं किए जाने पर भी अधिकरण ने नाराजगी जताई. निगम को अगली सुनवाई से पहले अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं.
-तालाब में पहुंच रहा गंदा पानी
पर्यावरणविद् नितिन सक्सेना की याचिका पर सुनवाई के दौरान अधिवक्ता हरप्रीत सिंह गुप्ता ने बताया कि शाहपुरा तालाब अधिसूचित वेटलैंड है. इसके बावजूद तालाब में बिना उपचारित गंदा पानी पहुंचने और बफर क्षेत्र में अतिक्रमण की समस्या बनी हुई है. याचिका में इसे वेटलैंड संरक्षण एवं प्रबंधन नियम, 2017 का उल्लंघन बताया गया है.
