भोपाल। मध्यप्रदेश में ग्रामीण पर्यटन तेजी से अपनी पहचान बना रहा है। शहरों की भीड़ और भागदौड़ से दूर गांवों की हरियाली, साफ हवा, पारंपरिक खान-पान और स्थानीय जीवनशैली पर्यटकों को आकर्षित कर रही है। नवभारत सरोकार की खास रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश में ग्रामीण पर्यटन के जरिए स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर भी तैयार हो रहे हैं।
2025 में पहुंचे 21.05 करोड़ पर्यटक
आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 में मध्यप्रदेश में 21 करोड़ 5 लाख पर्यटक पहुंचे। यह संख्या वर्ष 2024 की तुलना में 57 फीसदी अधिक है। ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में मध्यप्रदेश देश में 9वें स्थान पर है। प्रदेश में अब तक 418 ग्रामीण होमस्टे तैयार किए गए हैं, जिनके जरिए 34 हजार से ज्यादा पर्यटक ग्रामीण जीवन, स्थानीय संस्कृति और पारंपरिक मेहमाननवाजी का अनुभव ले चुके हैं।
छिंदवाड़ा के सावरवानी में 2014 से मॉडल
छिंदवाड़ा के सावरवानी में वर्ष 2014 से होमस्टे मॉडल विकसित किया जा रहा है। यहां देश के अलग-अलग हिस्सों के अलावा फ्रांस, यूएई, स्वीडन, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और ब्रिटेन से भी पर्यटक पहुंच चुके हैं।
नोडल अधिकारी बलराम राजपूत के मुताबिक, सावरवानी को मॉडल होमस्टे गांव के तौर पर विकसित किया गया है। हाल ही में बंगाल की एक टीम ने यहां करीब एक सप्ताह तक फिल्म की शूटिंग की। इससे स्थानीय परिवारों को ठहरने की सुविधा से आय हुई, युवाओं को काम मिला और महिलाओं ने भोजन व मेहमाननवाजी की जिम्मेदारी संभाली।
सीधी के बकवा में 10 होमस्टे की योजना
सीधी के बकवा में ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 10 होमस्टे विकसित किए जाने हैं। इनमें से 6 होमस्टे शुरू हो चुके हैं। परियोजना में स्थानीय समुदाय को भी जोड़ा गया है।
एमपी टूरिज्म बोर्ड के एमडी डॉ. इलैयाराजा टी. के मुताबिक, ग्रामीण होमस्टे से स्थानीय युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं।
सांसद डॉ. राजेश मिश्रा ने आदिवासी क्षेत्रों को पर्यटन से जोड़ने की संभावनाओं पर जोर दिया है। वहीं धौहनी विधायक कुंवर सिंह टेकाम ने आदिवासी संस्कृति और प्राकृतिक जीवनशैली को पर्यटन की पहचान से जोड़ने की बात कही है।
जबलपुर में करीब 100 होमस्टे
रिपोर्ट में जबलपुर में करीब 100 होमस्टे और करीब 15 लाख रुपये सालाना राजस्व का उल्लेख किया गया है। होमस्टे वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष शरद दीक्षित के मुताबिक, इससे पर्यटकों को गांव की संस्कृति, खान-पान और स्थानीय जीवन से सीधे जुड़ने का मौका मिलता है।
पर्यटन विभाग के क्षेत्रीय प्रबंधक नवीन शर्मा के मुताबिक, जबलपुर में होमस्टे की संख्या बढ़ रही है और ग्रामीण पर्यटन के विस्तार की संभावनाएं भी बनी हुई हैं।
इंदौर के बड़खेड़ा में गांव का अनुभव ले रहे पर्यटक
इंदौर के बड़खेड़ा में पर्यटक मिट्टी-खपरैल के घरों में ठहरकर ग्रामीण जीवन का अनुभव ले रहे हैं। यहां चूल्हे पर तैयार भोजन और खेतों से सीधे मिलने वाली ताजी सब्जियां पर्यटकों को आकर्षित कर रही हैं।
होमस्टे संचालक सूरज यादव के मुताबिक, मानसून के दौरान और वीकेंड पर पर्यटकों की बुकिंग बढ़ जाती है। हालांकि करीब 3 किलोमीटर का कच्चा घाट मार्ग अभी भी पर्यटकों की आवाजाही के लिए चुनौती बना हुआ है।
पर्यटन के साथ ग्रामीण रोजगार को भी बढ़ावा
मध्यप्रदेश में ग्रामीण पर्यटन का विस्तार सिर्फ पर्यटकों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है। होमस्टे के जरिए ग्रामीण परिवारों को अतिरिक्त आय, युवाओं को रोजगार और महिलाओं को स्थानीय स्तर पर काम के अवसर मिल रहे हैं।
57 फीसदी पर्यटक वृद्धि, 21.05 करोड़ पर्यटक और 418 ग्रामीण होमस्टे के आंकड़े बताते हैं कि मध्यप्रदेश के गांव अब पर्यटन के साथ-साथ स्थानीय रोजगार और स्वरोजगार के नए केंद्र के रूप में भी उभर रहे हैं।
