बागली: 18वर्ष के लंबे अवरोध के बाद विगत 3 वर्ष पूर्व बड़ी मुश्किल से धारा जी घाट निर्माण के साथ वहां पर स्नान पर्व की वैकल्पिक छूट मिली, लोगों को जैसे ही घाट निर्माण की जानकारी लगी धीरे-धीरे उनकी संख्या बढ़ने लगी 2024/ 2025 मैं यहा आने वाले श्रद्धालुओं का आंकड़ा 50000 संख्या तक पहुंचा लेकिन इस वर्ष यह आंकड़ा एक लाख से अधिक रहेगा। नरसिंहपुर ग्राम पंचायत अंतर्गत आने वाले इस स्थान पर पंचायत द्वारा कई बार शासन प्रशासन का ध्यान आकर्षण करने के बाद भी घाट पर नियमित साफ सफाई नहीं हो पा रही घाट की पेडियो पर चिकनी काइ जमा होने से यह घाट फिसलन भरा हो चुका है।
श्रद्धालु स्नान करते समय फिसल कर घायल होते हैं ।दूसरी ओर घाट पर पर्याप्त विद्युत व्यवस्था नहीं है। जबकि स्नान पर्व पर एक दिन पहले से श्रद्धालु आना शुरू हो जाते हैं। शौचालय की स्थिति भी गंभीर है, यहां से निकलने वाला मल मूत्र सीधे नर्मदा नदी में श्रद्धालुओं के सामने ही मिलता है ।मजबूरी में श्रद्धालु इस पानी में नहाते हैं। पिपरी से धारा जी 12 किलोमीटर मार्ग पर कई बार जाम लगने जैसी स्थिति आती है। कारण यह है की रास्ता बहुत खराब और संकरा है। इस वर्ष बड़ी संख्या में पुलिस व्यवस्था की भी आवश्यकता महसूस की जा रही है। पार्किंग के नाम पर अवैध वसूली जेसी घटनाएं घट सकती है ।यह मामला भी सामने आ रहा है।
प्रशासन के पास अभी भी समय है जिन स्थानों पर अत्यधिक खराब मार्ग है ,वहां सुधार किया जा सकता है। मुख्य घाट पर गंदगी होने की वजह से लोग कच्चे घाट की और स्नान करना ज्यादा पसंद करते हैं। लेकिन वह बेहद खतरनाक है ,वहां पर पानी की गहराई बहुत है। बोल बम कावड़ यात्रा से जुड़े गिरधर गुप्ता ने बताया कि उन्होंने पत्र लिखकर प्रशासन को 15 दिन पूर्व अवगत कराया है ।साथ में स्थानीय प्रशासन और पंचायत के माध्यम से भी इस समस्या को आगे रखा है। अन्य श्रद्धालुओं ने बताया कि विगत वर्ष की तरह इस वर्ष भी यहां आने जाने का मामला टोल फ्री होना चाहिए किसी से कुछ भी वसूली न की जाए। गौरतलब है कि अप्रैल 2005 में बड़ा हादसा होने की वजह से 18 वर्ष तक यहां पर स्नान व्यवस्था पर रोक लगी थी। आधिकारिक जानकारी के अनुसार अभी भी विधि सम्मत आदेश आत्मक स्नान पर्व की अनुमति नहीं मिली है।
इसके पीछे का कारण क्या हो सकता है। यह रोचक बात है। नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण द्वारा इस घाट को खतरनाक घाट बताते हुए कोर्ट से स्नान पर्व पर रोक लगवा दी थी। हालांकि कालांतर में पूर्व विधायक द्वारा यहां पर प्रयास करते हुए घाट का निर्माण तो करवा दिया, लेकिन मेले की अधिकृत अनुमति अभी तक नहीं मिली है। फिर भी श्रद्धालु इस स्थान पर आकर्षित होते हुए पहले की तरह लगातार बढ़ रहे हैं ।सर्व पितृ अमावस्या का विकल्प आंवली घाट भी अब विकास के चलते प्रकृति की वैभव को चुका है। इसी प्रकार धारा जी भी ओंकारेश्वर परियोजना के चलते बैक वाटर जल लेवल से प्राकृतिक स्वरूप को चुका है ।फिर भी मान्यता इस स्थान की अधिक है ,इसलिए श्रद्धालु यहां पर बड़ी संख्या में आते हैं। श्रद्धालुओं ने बताया कि समय रहते प्रशासन सुविधाओं को व्यवस्थित करदें
क्या अव्यवस्था है वहां
सड़क विद्युत के साथ-साथ चेंजिंग रूम की उचित सुविधा नहीं है साथ में पर्व के दौरान पानी की मात्रा काम कर दी जाती है जिससे घाट पर कीचड़ समस्या बढ़ जाती है लोगों शुद्ध पानी में स्नान नहीं कर पाते प्रशासन को चाहिए कि पर्व के दौरान जल स्तर कम से कम घाट के लेवल का रखें ताकि शुद्ध पानी में श्रद्धालु स्नान कर सके
