नई दिल्ली, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली को लेकर चल रहे विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस उज्जल भुइयां की एक टिप्पणी ने देश की राजनीतिक सरगर्मी को और तेज कर दिया है। हाल ही में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान जस्टिस भुइयां ने दोटूक शब्दों में कहा कि ऐसी कोई भी प्रक्रिया जो व्यापक पैमाने पर भारतीय नागरिकों को उनके वोट देने के अधिकार से वंचित करती है, वह पूरी तरह से मनमाना और असंवैधानिक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अनुच्छेद 326 में किसी भी तरह का बदलाव या समझौते की गुंजाइश नहीं है क्योंकि कोई भी संस्था या अदालत संविधान से ऊपर नहीं हो सकती। इस बेबाक बयान के बाद विपक्षी दलों ने इसे न्यायपालिका की स्वतंत्रता और जनता के अधिकारों की बड़ी जीत बताया है।
अभिषेक मनु सिंघवी और प्रमोद तिवारी ने की तारीफ, टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने भी सराहा
जस्टिस भुइयां के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने उनकी तारीफ करते हुए कहा कि वे देश के सबसे सम्मानित और बेबाक न्यायविदों में से एक हैं, जो बिना किसी डर के आम आदमी के अधिकारों की बात रखते हैं। वहीं, कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने भी समर्थन जताते हुए कहा कि आज संविधान प्रदत्त मतदान के अधिकार को कमजोर करने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिसे कांग्रेस पार्टी लगातार संसद से लेकर सड़क तक उठा रही है। इसके अलावा तृणमूल कांग्रेस (TMC) की नेता महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा कि सेवानिवृत्ति के बाद तो हर कोई बोलता है, लेकिन मौजूदा जज द्वारा सत्ता के सामने सच बोलना एक बड़ी मिसाल पेश करता है।
विपक्ष हमलावर: चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे हैं लगातार गंभीर सवाल
मुख्य चुनाव आयुक्त की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची से जुड़े खुलासों के बाद से ही देश के कई हिस्सों में विपक्षी दल लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा और पूर्व न्यायाधीशों द्वारा लोकतंत्र और मतदान के अधिकार को लेकर दिए जा रहे बयानों ने विपक्ष के हाथों में एक मजबूत हथियार थमा दिया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि सरकार और चुनाव आयोग को जनता की चिंताओं को नजरअंदाज करने के बजाय पारदर्शी तरीके से काम करना चाहिए। देश के राजनीतिक गलियारों में इस समय यह बहस छिड़ गई है कि क्या संवैधानिक संस्थाएं अपने दायरे में रहकर काम कर रही हैं, जिससे आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है।

