सतना: जेल अधीक्षक श्रीमती लीना कोष्टा के मार्गदर्शन में सेवा संकल्प अभियान व “मद्य निषेध सप्ताह” के अन्तर्गत जेल स्टॉफ व बंदियों के मध्य नशामुक्त भारत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।इस अवसर पर बंदियों को प्रत्येक प्रकार के नशे से होने वाले दुष्परिणामों से अवगत कराया गया। नशे से तन, मन, धन, परिवार का विनाश होता है। नशे का उपयोग करने वाला व्यक्ति अपने स्वयं के लिये परिवारजन, समाज व देश की भलाई व तरक्की के लिये कुछ भी योगदान नहीं दे पाता। जिस देश का युवक नशे में डूबा रहता है वह देश कभी भी ऊँचाइयां नहीं छू सकता है।
जेल उपअधीक्षक सोनवीर सिंह कुशवाह ने बंदियों को संबोधित करते हुये कहा कि अधिकांशतः अपराध किसी न किसी नशे का प्रयोग करके हुआ है। नशा नाश की जड़ है। जेलों में अधिकतर बंदियों से अपराध अशिक्षा व नशे के कारण हुआ है। आपको आत्म अवलोकन करने की आवश्यकता है आपने जो अपराध किया है वह सही है या नहीं। आपकी अंतरात्मा एक बार यही कहेगी कि आपके द्वारा जो कृत्य किया गया वह नहीं करना चाहिए था।
इसलिये सोते समय प्रत्येक दिन की दिनचर्या का अवलोकन जरूर करना चाहिए। अच्छे व बुरे कृत्यों के बारे में विचार करना चाहिये, बुरे कृत्यों की माफी मांगते हुये भविष्य में ऐसा न करने का संकल्प लेना चाहिये।इस अवसर पर सोनवीर सिंह कुशवाह जेल उप अधीक्षक, अनिरूद्ध कुमार तिवारी कल्याण अधिकारी, श्रीमती फिरोजा सिंह सहायक जेल अधीक्षक, अनिल प्रताप सिंह सहायक जेल अधीक्षक / अष्टकोण अधिकारी एवं जेल स्टॉफ व बंदीगण उपस्थित रहे।
योग का लें सहारा
जेल उप अधीक्षक ने कहा कि यदि नशे को नहीं छोड पा रहे हैं, तो इसके लिये योग एवं प्राणायाम का सहारा अवश्य लेना चाहिये। प्राणायाम, अनुलोम-विलोम, कपालभांति व अन्य सहायक व्यायामों का सहारा लेना चाहिये। जेल उपअधीक्षक सोनवीर सिंह कुशवाह द्वारा जेल स्टॉफ व बंदियों को अपने समुदाय, परिवार, मित्रों एवं स्वयं को नशे से दूर रहने की शपथ दिलाई गई।
