नई दिल्ली, देश के ऑटोमोबाइल सेक्टर में प्रदूषण को कम करने और पर्यावरण अनुकूल वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं। ऊर्जा मंत्रालय द्वारा नए कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल इकोनॉमी (CAFE-3) नियमों को आधिकारिक तौर पर नोटिफाई कर दिया गया है। ये सख्त नियम आगामी 1 अप्रैल 2027 से लागू हो जाएंगे और मार्च 2032 तक प्रभावी रहेंगे। सरकार के इस बड़े फैसले से वाहन निर्माताओं को अपने बेड़े के कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) उत्सर्जन स्तर को तय सीमा के भीतर रखने के लिए नई तकनीकों को तेजी से अपनाना होगा।
एसयूवी और भारी वाहनों के लिए लक्ष्य हुए कड़े, संदर्भ वजन में बदलाव से छोटी कारों को मिली आंशिक राहत
नए नियमों के तहत सरकार ने पिछले साल के ड्राफ्ट में छोटी पेट्रोल कारों के लिए प्रस्तावित विशेष छूट को पूरी तरह से समाप्त कर दिया है, जिसका कई ऑटो कंपनियों ने विरोध किया था। हालांकि, अंतिम नियमों में वाहनों के संदर्भ वजन (Reference Weight) की सीमा को 1,170 किलोग्राम से बढ़ाकर 1,229 किलोग्राम कर दिया गया है, जिससे कम वजन वाली कुछ कारों को मामूली राहत जरूर मिली है। वहीं दूसरी ओर, एसयूवी (SUV) और अन्य भारी वाहनों के बेड़े के लिए उत्सर्जन के लक्ष्य पहले से कहीं अधिक कड़े कर दिए गए हैं, जिससे ऑटो कंपनियों को अपने वाहन निर्माण डिजाइनों में बड़े बदलाव करने होंगे।
ऑटो सेक्टर में पहली बार लागू होगा क्रेडिट-डेबिट सिस्टम, ग्रीन टेक्नोलॉजी अपनाने वाली कंपनियों को मिलेगा फायदा
इन नए नियमों की सबसे खास बात यह है कि सरकार ने भारतीय ऑटो इंडस्ट्री के लिए पहली बार ‘क्रेडिट-डेबिट’ प्रणाली शुरू की है। जो कंपनियां तय मानकों से कम कार्बन उत्सर्जन करेंगी, वे ‘क्रेडिट’ अर्जित करेंगी, जबकि लक्ष्य चूकने वाली कंपनियों पर पेनल्टी या ‘डेबिट’ का प्रावधान रहेगा। इसके साथ ही इलेक्ट्रिक वाहनों (BEV) को 3 गुना, प्लग-इन हाइब्रिड को 2.5 गुना और स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड वाहनों को 1.6 गुना का ‘सुपर-क्रेडिट’ वेटेज फैक्टर दिया गया है, जिससे कंपनियों के बीच भारतीय बाजार में ज्यादा से ज्यादा ग्रीन और इलेक्ट्रिक गाड़ियां उतारने की होड़ मचेगी।

