देहरादून, (वार्ता) उत्तराखंड के पर्यटन, धर्म एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज के बद्रीनाथ मंदिर में शंख बजाने को लेकर दिये गये बयान पर नया विवाद खड़ा हो गया है। उन्होंने मंदिर परिसर में संगीत कार्यक्रमों पर प्रतिबंध की रिपोर्टों को तो खारिज कर दिया, लेकिन यह कहकर नया विवाद पैदा कर दिया कि शंख ‘हड्डी का बना होता है’, इसलिए इसे मंदिर के भीतर बजाने की अनुमति नहीं है।
मंत्री की इस टिप्पणी के बाद धार्मिक और पुरोहित वर्ग में भारी नाराजगी है और उनके बयान की तीखी आलोचना की जा रही है।
बद्रीनाथ धाम में आयोजित एक उत्सव का वीडियो वायरल होने और पूर्व भाजपा अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी के इस पर सवाल उठाये जाने के बाद सतपाल महाराज ने यह स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने कहा कि बद्रीनाथ क्षेत्र में संगीत, नृत्य या सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर प्रतिबंध की रिपोर्टें पूरी तरह से गलत, निराधार और भ्रामक हैं।
उन्होंने कहा कि पारंपरिक रूप से कपाट खुलने के समय भारतीय सेना का बैंड भक्ति धुनें बजाता है और बद्रीनाथ धाम में संगीत तथा सनातन संस्कृति से जुड़े कार्यक्रम हमेशा से होते रहे हैं।
शंख को ‘हड्डी से बना’ बताने वाले उनके बयान की चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत ने तीव्र निंदा की है। महापंचायत के महासचिव बृजेश सती ने मंत्री के बयान को हास्यास्पद करार देते हुए कहा कि देशभर में घरों, मंदिरों और तीर्थ स्थलों पर पारंपरिक रूप से शंख बजाया जाता है।
उन्होंने मंत्री के इस ज्ञान पर सवाल उठाते हुए कहा कि खुद को आध्यात्मिक गुरु बताने वाले महाराज को शंख की उत्पत्ति से जुड़ा ऐसा “दिव्य ज्ञान” कहां से प्राप्त हुआ।
मंत्री ने सभी से देवभूमि की गरिमा बनाये रखने में सहयोग की अपील करते हुए कहा कि राज्य सरकार चारधाम की पवित्रता, परंपराओं और धार्मिक मर्यादा को बनाये रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
