नई दिल्ली, कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी में मीडिया से बातचीत करते हुए बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल (All-Party Delegation) की अगवानी करने और मुलाकात का समय देने का औपचारिक अनुरोध किया है। मुख्यमंत्री पश्चिमी घाट के इकोलॉजिकली सेंसिटिव एरिया (ESA) पर के. कस्तूरीरंगन समिति की सिफारिशों तथा राज्य में गहराते सूखे के गंभीर संकट को लेकर प्रधानमंत्री के सामने अपनी बात रखना चाहते हैं। पिछले हफ्ते ही कर्नाटक विधानसभा ने सर्वसम्मति से केंद्र सरकार के सातवें ड्राफ्ट नोटिफिकेशन को खारिज करने का फैसला किया था, जिसमें ग्राउंड-लेवल सर्वे और सीमाओं की समीक्षा की मांग की गई है।
किसानों को भारी नुकसान की आशंका, मेकेदातु डैम परियोजना और केंद्रीय मंत्रियों के साथ हुई बैठकों पर भी दी अहम जानकारी
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य के 200 से अधिक तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया जा सकता है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। मेकेदातु डैम परियोजना से जुड़े एक सवाल पर उन्होंने स्पष्ट किया कि हाल ही में केंद्रीय टीम ने मौके का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया है। इसके अलावा, सोमवार को दिल्ली पहुंचने के बाद शिवकुमार ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल से भी मुलाकात की, जिसमें रक्षा मंत्रालय से जुड़े लंबित मामलों और राज्य के जल संबंधी मुद्दों को जल्द से जल्द निपटाने का आग्रह किया गया।
तमिलनाडु के साथ जल विवाद और प्रशासनिक मोर्चे पर निरंतर संवाद की कोशिश, जल्द तय होगी औपचारिक बैठक
तमिलनाडु के साथ नदी जल बंटवारे और मेकेदातु परियोजना पर चल रहे गतिरोध के संबंध में शिवकुमार ने कहा कि उन्होंने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री से इस मामले पर विचार-विमर्श के लिए उचित समय पर मीटिंग रखने का अनुरोध किया है। उन्होंने दोहराया कि राज्य सरकार किसानों के हितों की रक्षा और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री कार्यालय से मुलाकात के लिए अभी आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है, लेकिन राज्य के इन अहम मुद्दों को लेकर दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में हलचल काफी तेज हो गई है।

