इंदौर: शहर के चर्चित प्रॉपर्टी कारोबारी और कॉलोनी डेवलपर बंटी उर्फ संदीप नागर की आत्महत्या के बाद पुलिस की जांच अब उनके कारोबार से जुड़े कई पहलुओं तक पहुंच गई है. रविवार को पलासिया थाना क्षेत्र स्थित ऑफिस में फांसी लगाने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की. सोमवार को कार्रवाई के बाद ऑफिस सील कर दिया. फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट और एफएसएल टीम ने भी मौके पर पहुंचकर जरूरी साक्ष्य जुटाए. पुलिस ने दो मोबाइल जब्त किए हैं और ऑफिस के सीसीटीवी फुटेज की भी जांच की जा रही है. फिलहाल मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है.
जांच में सामने आया है कि बंटी नागर घटना से कुछ दिन पहले तक अपने प्रॉपर्टी कारोबार में सक्रिय थे. पिछले सप्ताह ही उन्होंने दरजी कराड़िया में करीब 10 बीघा जमीन की रजिस्ट्री कराई थी. सांवेर रोड, कनाड़िया, सुपर कॉरिडोर और डीएलएफ के पीछे सहित कई क्षेत्रों में उनके प्रोजेक्ट चल रहे थे. पुलिस अब हाल की जमीन रजिस्ट्री, प्रोजेक्ट से जुड़े लेनदेन और घटना से पहले की कारोबारी गतिविधियों को भी जांच का हिस्सा बना रही है.
आर्थिक संकट से उबरकर खड़ा किया था बड़ा कारोबार
बंटी नागर का परिवार पहले से ही सोने-चांदी के बड़े कारोबार से जुड़ा रहा है. उनके पिता और तीनों भाई ज्वेलरी कारोबार संभालते थे. बाद में पिता ने जेल रोड पर सीआईएफ ज्वेलर्स शुरू किया, जबकि बड़े भाई राजेश नागर अब भी ज्वेलरी कारोबार से जुड़े हैं. बंटी ने परिवार के पारंपरिक कारोबार से अलग रियल एस्टेट का रास्ता चुना. कारोबार के शुरुआती दौर में उन्हें आर्थिक संकट का सामना भी करना पड़ा था. बताया गया है कि एक समय संपत्तियां बेचकर देनदारियां चुकानी पड़ी थीं. इसके बाद उन्होंने दोबारा कारोबार खड़ा किया और संस्कृति डेवलपर्स के माध्यम से कई कॉलोनियां और टाउनशिप विकसित कीं. पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार उनका कारोबार बढ़कर करीब 800 करोड़ रुपए के टर्नओवर तक पहुंच गया था. रियल एस्टेट कारोबार में शुरुआती दौर में सुमति जैन उनके साझेदार रहे. कुछ वर्ष पहले सुमति जैन की स्वाइन फ्लू से मौत के बाद बंटी नागर ने कारोबार और उससे जुड़ी कमाई की जिम्मेदारी संभाली थी. इसके बाद उन्होंने कारोबार का विस्तार किया और कई नए प्रोजेक्ट शुरू किए.
डायरी पर प्लॉट लेने वालों की भी बढ़ी चिंता
बंटी नागर के कई प्रोजेक्ट चल रहे थे. बाजार से जुड़े लोगों के अनुसार इनमें बड़ी संख्या में प्लॉटों के सौदे डायरी के माध्यम से किए जाने की चर्चा है. ऐसे में उनकी मौत के बाद डायरी पर प्लॉट लेने वाले लोगों के बीच अपने सौदों, रिकॉर्ड और आगे की प्रक्रिया को लेकर चिंता बढ़ी है. प्रोजेक्टों से जुड़े वास्तविक लेनदेन और उनकी स्थिति की जानकारी भी अब पुलिस की जांच में सामने आ सकती है.
कारोबारी विवादों की कड़ियां भी खंगाल रही पुलिस
पड़ताल में एक राजनेता के भाई और मुंबई के एक कारोबारी से जुड़े विवाद की जानकारी भी सामने आई है. बताया जा रहा है कि बड़ी रकम और उस पर ब्याज को लेकर भुगतान का दबाव था. हालांकि, परिचितों के अनुसार बंटी नागर की आर्थिक स्थिति को लेकर ऐसी कोई स्पष्ट बात सामने नहीं आ रही थी, जिससे उनकी वित्तीय स्थिति बेहद खराब मानी जाए. पुलिस इस विवाद को भी जांच के एक पहलू के रूप में देख रही है.
कनाड़िया की जमीन को लेकर विवाद की जानकारी भी सामने आई है. बताया जा रहा है कि जमीन से जुड़े कुछ मामले राजस्व विभाग में थे और उन्हें सुलझाने के प्रयास चल रहे थे. इस मामले में बंटी नागर का काफी पैसा लगा होने की बात भी सामने आई है. इसके अलावा एक महिला कारोबारी साझेदार से जुड़े विवाद की चर्चाएं भी हैं. इन सभी बातों की अभी स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है और पुलिस जांच के बाद ही इनका वास्तविक स्वरूप स्पष्ट होगा.
मोबाइल में तलाशे जा रहे आखिरी दिनों के सुराग
पुलिस ने बंटी नागर के दो मोबाइल जब्त किए हैं. कॉल, संदेश, फोटो और अन्य डिजिटल जानकारी की जांच की जा रही है. सीसीटीवी फुटेज से यह भी पता लगाया जा रहा है कि घटना से पहले ऑफिस में कौन कौन आया था. कारोबार से जुड़े साझेदारों, परिचितों और परिजनों से भी जानकारी ली जा रही है. पुलिस की शुरुआती जांच में ब्लैकमेलिंग, कारोबारी साझेदारी और आर्थिक दबाव से जुड़े पहलुओं को भी देखा जा रहा है.
इलाज के लिए मुंबई भी गए थे
बंटी नागर की तबीयत पिछले कुछ समय से खराब चल रही थी. करीब एक साल पहले उनका पेसमेकर लगाया गया था और इलाज के लिए वे मुंबई भी गए थे. स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी भी पुलिस की पड़ताल में शामिल है. हालांकि अभी तक किसी एक वजह को आत्महत्या का कारण नहीं माना गया है. बंटी नागर की मौत के बाद एक तरफ पुलिस वैज्ञानिक साक्ष्यों, मोबाइल और सीसीटीवी के जरिए घटना से पहले की परिस्थितियां समझने में जुटी है, वहीं दूसरी ओर उनके करोड़ों के कारोबार से जुड़े प्रोजेक्ट, जमीन के सौदे, डायरी पर हुए लेनदेन और पुराने विवाद भी चर्चा में हैं. हाल में 10 बीघा जमीन की रजिस्ट्री से लेकर लंबे समय से चल रहे प्रोजेक्टों तक की जानकारी अब जांच में महत्वपूर्ण मानी जा रही है. इन सभी कड़ियों को जोड़ने के बाद ही घटना के पीछे की वास्तविक परिस्थितियां स्पष्ट हो सकेंगी. मामले में एसीपी नीति दंडोतिया का कहना है कि फिलहाल जांच की जा रही है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिजनों के बयानों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.
