
ओंकारेश्वर। तीर्थ नगरी ओंकारेश्वर में श्राद्ध पक्ष के दौरान पवित्र नर्मदा नदी के घाटों पर पितृ तर्पण का क्रम जारी है। पत्रकार राकेश पुरोहित की रिपोर्ट के अनुसार घाटों पर श्रद्धालु अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष के लिए तर्पण कर रहे हैं, जो पूरे 16 दिनों तक चलेगा।
शास्त्रों के अनुसार आश्विन माह में श्राद्ध पक्ष शुरू होते ही पितृलोक पृथ्वी के सबसे निकट आ जाता है। मान्यता है कि इस दौरान पूर्वज यह देखने आते हैं कि उनकी संतानें उनके प्रति क्या श्रद्धा भाव रख रही हैं। तर्पण और ब्राह्मण भोजन से प्रसन्न होकर पितृगण सुख, समृद्धि और दीर्घायु का आशीर्वाद देते हैं, वहीं तर्पण न करने पर वे अतृप्त होकर लौटते हैं।
तर्पण में पवित्र कुश, कुश की अंगूठी (पवित्री), जौ, काली तिल, चावल, शहद, दूध, सफेद फूल, प्रसाद और जनेऊ का उपयोग किया जा रहा है।
शास्त्र नियमों के अनुसार चावल (अक्षत) से देवताओं का, जौ से ऋषियों का और काली तिल से मनुष्यों और पूर्वजों का तर्पण किया जाता है।
