
ग्वालियर। ग्वालियर की स्वर्ण रेखा नदी की त्रासद दास्तान से भी कोई सबक न लेते हुए, क्या अब जिम्मेदार अधिकारियों ने शिवपुरी की ऐतिहासिक सांख्य सागर यानि चाँदपाठा झील को पूरी तरह बर्बाद करने की ठान ली है?
शिवपुरी की बहुप्रतीक्षित सीवर परियोजना का हाल इतना बेपटरी हो चुका है कि 67 करोड़ रुपये की स्वीकृत योजना पर 13 साल बीत जाने और 111 करोड़ रुपये से अधिक झोंकने के बाद भी यह पूरी तरह दम तोड़ चुकी है। मूल लागत से 44 करोड़ रुपये अधिक खर्च किए जाने के बावजूद स्थिति यह है कि आज तक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट चालू नहीं हो सका है। नतीजा यह है कि शिवपुरी शहर का पूरा का पूरा सीवर और गंदा पानी बिना किसी ट्रीटमेंट के सीधे नालों के रास्ते सांख्य सागर झील में उड़ेला जा रहा है। जिस झील को शहर की खूबसूरती और पर्यावरण का प्राण माना जाता है, उसे प्रशासनिक उदासीनता ने सीवेज का गंदा नाला बना दिया है। अब संख्य सागर में पहुंच रहे सीवेज और कचरे को रोकने के लिए 191.24 करोड़ रुपये के अतिरिक्त प्रस्ताव का उल्लेख भी न्यायालयीन रिकॉर्ड में हुआ है। शिवपुरी प्रवास के दौरान केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भी सीवर लाइन में हुए भारी भ्रष्टाचार पर सार्वजनिक मंच से अपनी अप्रसन्नता जाहिर कर चुके हैं।
*ईएनसी का दौरा और तीखे तेवर: रिकवरी होगी, जिम्मेदार कार्रवाई के लिए रहें तैयार*
मामले में हाईकोर्ट, ग्वालियर के कड़े निर्देशों और जनहित याचिका की सख्ती के बाद इंजीनियर इन चीफ प्रदीप एस. मिश्रा ने शिवपुरी का मैदानी दौरा किया। झाँसी तिराहे पर सीवर चैंबर खोलकर जब हकीकत परखी गई, तो भीतर फंसे मलबे को मजदूर निकालते नजर आए। दौरे के बाद ईएनसी मिश्रा ने बताया कि पूर्व में भारी तकनीकी चूक और लापरवाही बरती गई है, जिसके चलते सीवर लाइन चोक पड़ी है और प्रोजेक्ट ठप है। उन्होंने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि जनता के पैसे की बर्बादी पर भारी-भरकम रिकवरी निकाली जाएगी और इस भ्रष्टाचार में लिप्त कई लोग सख्त आपराधिक कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
*अब निगाहें 28 सितंबर की सुनवाई पर*
हाईकोर्ट के रुख को देखते हुए पीएचई और नगरीय विकास विभाग के अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को तय है, जहां यह फैसला होना है कि इस नाकामी का ठीकरा किस पर फूटेगा और किसकी जवाबदेही तय होगी। बहरहाल, क्या हुक्मरान अपनी जिद और भ्रष्टाचार के चलते इस प्राकृतिक धरोहर को हमेशा के लिए नेस्तनाबूद कर देंगे? यह एक ऐसा सवाल है जिसका जवाब अब न्यायपालिका की सख्ती ही तय करेगी।
