मोदी ने ‘मेक इन इंडिया’ के 12 साल पूरे होने पर कहा – ‘भारत शेष दुनिया के लिए भी विनिर्माण कर सकता है’

नयी दिल्ली, 25 सितंबर (वार्ता) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज ‘मेक इन इंडिया’ पहल की 12वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में इसकी उपलब्धियों पर प्रकाश डाला जिसके चलते देश ने निवेश, रक्षा उत्पादन सहित विनिर्माण क्षेत्र और निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है। श्री मोदी ने लिखा है कि इससे विश्वास बढ़ा है कि भारत पूरी दुनिया के लिए उसकी जरूरत के सामानों के निर्माण में योगदान कर सकता है।
श्री मोदी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि इस पहल के परिणामस्वरूप भारत में उत्पादन बढ़ा है, निवेश में वृद्धि हुई है और निर्यात में भी इजाफा हुआ है। श्री मोदी ने कहा कि यह बदलाव सभी क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है। उन्होंने इस पोस्ट में लिखा, “भारत में अधिक उत्पादन।

भारत में अधिक निवेश। भारत से निर्यात में वृद्धि। हर क्षेत्र में बदलाव साफ दिख रहा है!” प्रधानमंत्री ने कहा, ”आज उस सोच की 12वीं सालगिरह है जो इस साधारण विश्वास पर आधारित है कि “भारत दुनिया के लिए मैन्युफैक्चरिंग कर सकता है”।” देश की औद्योगिक एवं वाणिज्यिक नीति और प्रशासन का काम संभाल रहे वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा , ” मेक इन इंडिया के 12 साल का पूरा होना सिर्फ़ एक मुकाम है। यह हमें याद दिलाता है कि जब कोई देश अपनी क्षमताओं पर भरोसा करता है और सरकार लगातार सुधारों और ठोस कदमों से उस भरोसे को मज़बूत करती है, तो क्या कुछ हासिल किया जा सकता है।”

उन्होंने मेक इन इंडिया पर प्रधानमंत्री की टिप्पणियों के संदर्भ में कहा, ” 2014 को याद करें, तो भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता पर हुई बहसें याद आती हैं। उस समय जब भारत में इस्तेमाल होने वाले कई प्रोडक्ट बाहर से मंगाए जाते थे, तब प्रधानमंत्री मोदी ने इसे अपनी किस्मत मानने से इनकार कर दिया था।” श्री गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री ने उस समय एक ऐसे भारत की कल्पना की जो न सिर्फ़ अपनी ज़रूरतों के लिए विनिर्माण करेगा, बल्कि दुनिया के लिए भी सामान तैयार करेगा। वाणिज्य मंत्री ने कहा, “श्री मोदी ने एक ऐसा भारत बनाने की कल्पना की जहाँ दुनिया भर में इस्तेमाल होने वाले प्रोडक्ट गर्व के साथ ‘मेड इन इंडिया’ का टैग लगाएंगे और अपनी क्वालिटी के लिए जाने जाएंगे।” उन्होंने कहा , ” हम उस सोच को हकीकत बनते हुए देख रहे हैं। आंकड़े एक उत्साहजनक कहानी बताते हैं। भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक का सबसे ज़्यादा सालाना (एफडीआई) प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आया (94.53 अर डॉलर) , जबकि वित्त वर्ष 2014-15 से 2025-26 तक देश में कुल एफडीआई निवेश 843 अरब डॉलर तक पहुँच गया।”

वाणिज्य मंत्री ने कहा कि विनिर्माण क्षेत्र को विश्वस्तर पर प्रतिस्पर्धा करने योग्य बनाने के लिए ‘नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट प्रोग्राम’ के तहत देश भर में नये नये स्मार्ट औद्योगिक-नगर स्थापित किये जा रहे हैं। कारोबार में आसानी हो इसके लिए नियम सरल किये जा रहे हैं और नियमों का जंजाल कम किया जा रहा है। श्री गोयल ने कहा कि मोदी सरकार ने कई चुनिंदा क्षेत्रों में सुधारों से निवेश और विनिर्माण के लिए नए मौके पैदा किए हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने पीएलआई (उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन की योजनाओं) का उल्लेख किया जिससे निवेश और विनिर्माण को और अधिग गति मिली है।
वाणिज्य मंत्री ने आंकड़े दिये हैं कि पीएलआई कार्यक्रम के चलते 31 मार्च, 2026 तक विभिन्न क्षेत्रों में 2.40 लाख करोड़ का असल निवेश , 23.8 लाख करोड़ रुपये का उत्पादन अथवा बिक्री और 15.2 लाख करोड़ रुपये का निर्यात हुआ है, साथ ही पीएलआई से सीधे और प्रेरित करोबार में 14.6 लाख से ज़्यादा नौकरियां पैदा हुई हैं।

उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स और टेलीकॉम, फार्मास्यूटिकल्स, मेडिकल डिवाइस, ऑटोमोबाइल, सूचना प्रौद्योगिकी हार्डवेयर और स्पेशलिटी स्टील जैसे सेक्टर को पीएलआई स्कीम से काफ़ी फ़ायदा हुआ है। श्री गोयल ने देश में अपने विकसित खुले बाजार मंच ‘ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स’ (ओएनडीसी) का भी उल्लेख किया है जो छोटे मझोले उद्योगों को बढ़ावा दे रहा है, और इस प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए 470 करोड़ से ज़्यादा ऑर्डर दिए गए हैं। उन्होंने कहा, ” लेकिन ‘मेक इन इंडिया’ की असली कहानी इन आंकड़ों से कहीं आगे की है। यह उस भरोसे की कहानी है जो इसने पैदा किया है। हमारे स्टार्टअप स्थापक, उद्यमी, विनिर्माता , नवप्रवर्तक , निर्यातक और सबसे बढ़ कर , हमारी जनता में यह भरोसा है कि ‘भारत बना सकता है, भारत नवाचार कर सकता है और भारत दुनिया के साथ मुकाबला कर सकता है।’ श्री गोयल ने कहा, ”मेक इन इंडिया’ का सफ़र और भी बड़े लक्ष्य के साथ जारी है: भारत को एक ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग पावरहाउस बनाना, जो 2047 तक ‘विकसित भारत’ के हमारे विज़न को भी मज़बूत करेगा।”

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