भोपाल। वरिष्ठ पत्रकार और नवभारत के पूर्व संपादक एल एन शीतल ने परम श्रद्धेय श्री रामगोपाल माहेश्वरी जी को याद करते हुए उनके पत्रकारिता जीवन और योगदान को नमन किया। उन्होंने कहा कि गुलामी के दौर में महज 23 वर्ष की उम्र में श्री रामगोपाल माहेश्वरी जी ने पत्रकारिता को पेशा नहीं, बल्कि मिशन बनाया और अखबार को आजादी की लड़ाई का माध्यम बनाया।
एल एन शीतल ने उनके संघर्ष, जेल यात्रा, आर्थिक और व्यक्तिगत समर्पण का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने जिस पौधे को रोपा, उसे आगे चलकर वटवृक्ष बनाया। 1934 में शुरू हुए नवभारत को उन्होंने दशकों तक पत्रकारिता के मूल्यों के साथ आगे बढ़ाया। उन्होंने कहा कि देश की आजादी और आजादी के बाद पत्रकारिता के मूल्यों को बनाए रखने में रामगोपाल माहेश्वरी जी के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता।
कार्यक्रम के दौरान एल एन शीतल ने श्री रामगोपाल माहेश्वरी जी के नाम पर एक शोध संस्थान स्थापित किए जाने की इच्छा भी व्यक्त की।
