नई दिल्ली, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बेटों से करीबी ताल्लुक रखने वाली एक ऑटोनॉमस सिस्टम कंपनी ‘पावरस’ (Porous) ने भारत की रक्षा क्षेत्र की दिग्गज कंपनी ‘पारस डिफेंस एंड स्पेस टेक्नोलॉजीज’ के साथ एक बड़ा रणनीतिक समझौता किया है। इस लाइसेंसिंग डील के तहत पारस डिफेंस को भारत के भीतर पावरस के उन्नत ‘गार्जियन’ एंटी-ड्रोन सिस्टम बनाने और उन्हें बेचने का एक्सक्लूसिव अधिकार (लाइसेंस) मिल गया है। दिलचस्प बात यह है कि यह समझौता ऐसे समय में सामने आया है जब कुछ ही महीने पहले इस अमेरिकी कंपनी ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर से मुलाकात के बाद पाकिस्तान को ड्रोन तकनीक और हथियारबंद सिस्टम बेचने के एक अन्य समझौते की घोषणा की थी।
कम लागत वाले हवाई खतरों से निपटने के लिए डिजाइन किया गया है ‘गार्जियन 1’ इंटरसेप्टर, ट्रंप परिवार से भी जुड़ा है कंपनी का कनेक्शन
पारस डिफेंस के साथ हुए इस करार के जरिए पावरस अपनी इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी का इस्तेमाल भारत में मैन्युफैक्चरिंग के लिए करेगी, जिसके बदले में भारतीय कंपनी लाइसेंस फीस और शुद्ध मुनाफे का एक हिस्सा साझा करेगी। ‘गार्जियन 1’ इंटरसेप्टर एक तेज गति से चलने वाला और बैटरी चालित काउंटर-ड्रोन सिस्टम है, जिसे ‘शहेद 136’ और ‘गेरान 2’ जैसे कम लागत वाले वन-वे अटैक ड्रोन तथा हवाई खतरों को हवा में ही नष्ट करने के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया है। कॉर्पोरेट रिकॉर्ड्स के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बेटे डोनाल्ड ट्रंप जूनियर और एरिक ट्रंप अपने ‘अमेरिकन वेंचर पार्टनर्स’ के जरिए इस कंपनी में प्रमुख निवेशक हैं, हालांकि कंपनी प्रतिनिधियों का कहना है कि ट्रंप परिवार का इसके रोजमर्रा के कामकाज पर कोई सीधा नियंत्रण नहीं है।
वैश्विक कारोबार के विस्तार में जुटी है अमेरिकी कंपनी, पाकिस्तान के साथ रणनीतिक सहयोग का भी हुआ है ऐलान
रावलपिंडी में पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर के साथ हुई बैठक के बाद पावरस के सह-संस्थापक ग्रेट वेलिकोविच ने इस साझेदारी को दोनों पक्षों के लिए एक बड़ा रणनीतिक ढांचा बताया है। हालांकि कंपनी ने पाकिस्तान को बेचे जा रहे विशेष सैन्य उपकरणों के नाम का खुलासा नहीं किया है, लेकिन जारी की गई तस्वीरों से संकेत मिलता है कि वहां गार्जियन सीरीज के अधिक एडवांस्ड वर्जन की सप्लाई की जा सकती है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि एक तरफ भारत की निजी डिफेंस कंपनियों के साथ तकनीक का आदान-प्रदान और दूसरी तरफ पाकिस्तान के साथ रक्षा सहयोग, अमेरिकी स्टार्टअप्स की वैश्विक स्तर पर अपने कारोबार और रक्षा उत्पादों के प्रसार की आक्रामक रणनीति का हिस्सा है।

