
इंदौर. साइबर ठगों ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और अभिनेता थलपति विजय के नाम का इस्तेमाल कर ‘सीएम विजय फाउंडेशन’ के नाम से नया ठगी का तरीका शुरू किया है. लोगों को बिजनेस, एजुकेशन और स्टार्टअप लोन के साथ विदेश में पढ़ाई के लिए आर्थिक सहायता का झांसा देकर संदिग्ध रजिस्ट्रेशन लिंक भेजे जा रहे हैं. इंदौर क्राइम ब्रांच और साइबर सेल के पास ऐसे आधा दर्जन से अधिक शिकायतें पहुंची हैं.
साइबर ठग फोन पर खुद को ‘सीएम विजय फाउंडेशन’ का प्रतिनिधि बताते हैं. बातचीत के दौरान लोगों को उनकी जरूरत के मुताबिक बिजनेस शुरू करने, स्टार्टअप के लिए फंड अथवा एजुकेशन लोन दिलाने का भरोसा दिया जाता है. विदेश में पढ़ाई के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का लालच भी दिया जा रहा है. इस तरह बातचीत के जरिए पहले लोगों का भरोसा जीतने की कोशिश की जाती है. इसके बाद मोबाइल पर रजिस्ट्रेशन के लिए एक लिंक भेजी जाती है. लिंक खोलने के बाद ऑनलाइन फॉर्म में व्यक्तिगत जानकारी भरवाई जाती है. जानकारी हासिल करने के बाद ठग फाइल चार्ज, प्रोसेसिंग फीस और अप्रूवल शुल्क सहित अलग अलग मदों का हवाला देकर राशि जमा करने के लिए कहते हैं. रकम ट्रांसफर होने के बाद कई मामलों में ठगों का संपर्क बंद हो जाता है.
शिकायतें सामने आने के बाद क्राइम ब्रांच और साइबर सेल ने इस पूरे तरीके की पड़ताल शुरू कर दी है. पुलिस उन मोबाइल नंबरों की जांच कर रही है, जिनसे लोगों को कॉल किए. रकम जमा कराने के लिए इस्तेमाल बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन की जानकारी भी जुटाई जा रही है. संदिग्ध रजिस्ट्रेशन लिंक की तकनीकी जांच के जरिए उसके पीछे सक्रिय लोगों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है.
संगठित नेटवर्क की भी पड़ताल…
जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि चर्चित नाम का इस्तेमाल कर ठगी का यह तरीका किसी एक गिरोह ने तैयार किया है या अलग अलग साइबर ठग एक ही पैटर्न पर काम कर रहे हैं. कॉलिंग नंबर, बैंक खाते और डिजिटल कड़ियों को आपस में जोड़कर नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश की जा रही है. पुलिस के अनुसार किसी संस्था, फाउंडेशन या व्यक्ति के नाम पर फोन कर लोन, स्कॉलरशिप अथवा आर्थिक सहायता का प्रस्ताव दिया जाए तो उसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना जरूरी है. किसी भी अनजान लिंक पर व्यक्तिगत जानकारी भरने या रजिस्ट्रेशन, प्रोसेसिंग अथवा अप्रूवल के नाम पर राशि जमा करने से पहले संबंधित संस्था की आधिकारिक जानकारी जांचनी चाहिए.
कार्रवाई करेंगे : एडीसीपी
एडिशनल डीसीपी, क्राइम ब्रांच, राजेश दंडोतिया ने नव भारत को बताया कि शिकायतों के आधार पर इस तरीके से लोगों को संपर्क किए जाने की जांच की जा रही है. जिन नंबरों और खातों का उपयोग सामने आया है, उनकी तकनीकी पड़ताल जारी है. जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
