
कंपनी ने कहा कि यह कदम उन जल निकायों के नामों में अंतर होने की स्थिति में अपनायी जाने वाली उसकी पुरानी नीति के अनुरूप है। गूगल मैप्स में यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब कनाडा और अमेरिका के बीच व्यापार विवाद लगातार गहरा रहा है। व्हाइट हाउस के संचार निदेशक स्टीवन चेउंग ने सोशल मीडिया पर बदलाव का स्वागत करते हुए इसे ‘आधिकारिक’ बताया। ओंटारियो झील कनाडा और अमेरिका दोनों के बीच साझा है और दोनों देशों के बीच 1909 में हुए सीमा जल समझौते के तहत इसके जल के उपयोग से जुड़े विवादों को नियंत्रित किया जाता है। अमेरिका के राष्ट्रपति अमेरिकी सरकारी दस्तावेजों और मानचित्रों में किसी भौगोलिक नाम के इस्तेमाल का निर्देश दे सकते हैं, लेकिन वह दूसरे देशों को नया नाम अपनाने के लिए बाध्य नहीं कर सकते।
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि उनका देश झील को हमेशा ‘लेक ओंटारियो’ ही कहेगा। उन्होंने कहा कि इस नाम का इतिहास 400 वर्ष से अधिक पुराना है और यह अमेरिका तथा कनाडा दोनों के अस्तित्व में आने से पहले से प्रचलित है। श्री ट्रंप का यह कदम उनके पहले के उस फैसले के बाद आया है, जिसमें उन्होंने मेक्सिको की खाड़ी का नाम बदलकर ‘गल्फ ऑफ अमेरिका’ करने का आदेश दिया था। गूगल ने बाद में अमेरिका में अपने उपयोगकर्ताओं के लिए मानचित्रों पर नया नाम प्रदर्शित करना शुरू कर दिया था। इस बीच, अन्य मानचित्र सेवाओं ने ओंटारियो झील का नाम बदलने से इनकार किया है। रविवार तक वेज और एप्पल मैप्स पर इसका नाम ‘लेक ओंटारियो’ ही दिखायी दे रहा था। मैपक्वेस्ट ने भी सोशल मीडिया पर कहा कि वह नाम नहीं बदलेगा।
श्री ट्रंप ने कार्यकारी आदेश में कहा था कि झील का नाम बदलना इसलिए उचित है, क्योंकि झील के सबसे गहरे हिस्से और उसके अधिकांश जल की मात्रा अमेरिकी क्षेत्र में आती है।
उन्होंने इसे अमेरिका की विरासत का हिस्सा और देश के लिए महत्वपूर्ण संपत्ति बताया। इस बीच, कनाडा और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता भी ठप पड़ी हुई है। दोनों देशों के बीच बातचीत 21 अगस्त को अंतिम दौर में टूट गयी थी। इसके बाद अमेरिका ने 22 अगस्त से करीब 20 अरब डॉलर मूल्य के कनाडाई सामान पर 50 प्रतिशत शुल्क लगाया। जवाब में कनाडा ने अमेरिकी उत्पादों पर समान मूल्य के प्रतिशोधी शुल्क लगाने की घोषणा की है, जो आठ सितंबर से प्रभावी होंगे। इनमें दूध, इस्पात और प्लाईवुड जैसे उत्पाद शामिल हैं। इस प्रकार झील के नाम को लेकर पैदा हुआ विवाद दोनों देशों के बीच पहले से जारी व्यापारिक और राजनीतिक तनाव में एक नया प्रतीकात्मक मोर्चा बन गया है।
