
जयपुर, 31 अगस्त (वार्ता) राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर की ओर से लंबित लक्षित मामलों के निस्तारण के लिए जारी कार्ययोजना (छठे चरण) के विरोध में जयपुर बार संघ ने सोमवार को न्यायिक कार्य से विरत रहने का निर्णय लिया है। बार संघ जयपुर के अध्यक्ष सोमेश चंद शर्मा और महासचिव उमेश चौधरी की ओर से 27 अगस्त को जारी सूचना में सभी सदस्यों एवं अधिवक्ताओं को न्यायिक कार्य से विरत रहने के निर्णय से अवगत कराया गया है। सूचना के अनुसार राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर की ओर से 11 अगस्त को सभी जिला न्यायालयों को पत्र जारी करके लक्षित मामलों के निस्तारण के लिए कार्ययोजना निर्धारित की गई है।
बार संघ का मुख्य विरोध इस बात को लेकर है कि योजना में अब पांच वर्ष से अधिक पुराने मामलों को भी लक्षित निस्तारण में शामिल किया जा रहा है। बार संघ ने कहा है कि पहले 20 वर्ष या उससे अधिक पुराने मामलों के निस्तारण पर विशेष जोर दिया जा रहा था, लेकिन अब पांच वर्ष से अधिक पुराने मामलों को भी इस दायरे में शामिल किए जाने से अधीनस्थ न्यायालयों में मामलों के निस्तारण को लेकर दबाव बढ़ सकता है। संघ ने अपनी सूचना में आशंका जताई है कि निर्धारित लक्ष्य हासिल करने के दबाव में न्याय की गुणवत्ता और न्यायिक प्रक्रिया के बुनियादी मानदंड प्रभावित हो सकते हैं। साथ ही इसमें अधिवक्ताओं के निजी एवं पेशेवर जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव का भी उल्लेख किया गया है।
