जबलपुर: महाकौशल संभाग के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल, नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में कैथ लैब में तकनीकी खराबी आने के कारण जीवनरक्षक एंजियोग्राफी जांच पिछले कई दिनों से पूरी तरह बंद है। मशीन का एक मुख्य पार्ट खराब होने की वजह से लैब के दरवाजे पर ताला लटक रहा है। जबलपुर संभाग सहित आसपास के आधा दर्जन जिलों से हर दिन सीने में दर्द और हार्ट अटैक जैसी आपातकालीन स्थितियों में सैकड़ों गंभीर मरीज यहां पहुंचते हैं। कैथ लैब बंद होने से इन मरीजों की सांसें अटक गई हैं।
धमनियों के ब्लॉकेज की सटीक स्थिति जाने बिना डॉक्टरों के लिए आगे का इलाज जैसे एंजियोप्लास्टी या बाईपास सर्जरी तय करना पूरी तरह असंभव हो गया है। सूत्रों के मुताबिक संभाग के इतने बड़े अस्पताल में इस जीवनरक्षक उपकरण का कोई वैकल्पिक बैकअप तक उपलब्ध नहीं है, जिससे मरीज इलाज के लिए घंटों भटक रहे हैं। कैथ लैब की मशीनों के समय पर मेंटेनेंस न होने और पुराने कलपुर्जों को न बदले जाने के कारण यह तकनीकी खराबी आई है।
मेडिकल कॉलेज में जांच ठप होने का सीधा फायदा निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों और निजी अस्पतालों को मिल रहा है। आर्थिक तंगी से जूझ रहे गरीब निजी सेंटरों का रुख करना पड़ रहा है। निजी केंद्रों के महंगे और भारी-भरकम पैकेज चुकाने में गरीबों की जेब खाली हो रही है, और जो पैसे का इंतजाम नहीं कर पा रहे हैं, उनके अपनों का इलाज लगातार लेट हो रहा है। जब इस गंभीर अव्यवस्था और मरीजों की परेशानी को लेकर मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक डॉ. अरविंद शर्मा से उनके मोबाइल पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने कॉल रिसीव करना भी मुनासिब नहीं समझा।
