
नीमच। डाक बंगले के पीछे शनि मंदिर के समीप एक गाय घंटों तक प्रसव पीड़ा से तड़पती रही। गर्भ में बच्चा उल्टा हो जाने के कारण गाय की हालत लगातार बिगड़ रही थी। स्थानीय लोगों की सूचना पर गऊ सेवा दल के सदस्यों और पशु चिकित्सा विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर करीब डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद गाय की सुरक्षित डिलीवरी करवाई। समय रहते उपचार मिलने से गाय और उसके नवजात बच्चे की जान बच गई।
जानकारी के अनुसार शनि मंदिर के पास सुबह से एक गाय बच्चे को जन्म देने के लिए परेशान हो रही थी। काफी समय बीतने के बाद भी डिलीवरी नहीं होने पर स्थानीय लोगों ने मामले की जानकारी पार्षद हरगोविंद दीवान को दी। पार्षद ने ग्वालटोली क्षेत्र के ग्रुप में गाय की फोटो और जानकारी साझा की, ताकि यदि गाय का कोई मालिक हो तो वह मौके पर पहुंचकर उसकी मदद कर सके। हालांकि काफी समय तक कोई मालिक सामने नहीं आया।
सूचना मिलते ही सक्रिय हुआ गऊ सेवा दल
दोपहर करीब एक बजे स्थानीय लोगों ने गऊ सेवा दल के सदस्य मितेश अहीर को सूचना दी। सूचना मिलते ही मितेश अहीर मौके पर पहुंचे और गाय की गंभीर स्थिति को देखते हुए पशु चिकित्सा विभाग के उपसंचालक डॉ. आत्माराम धाकड़ से संपर्क किया।
डॉ. धाकड़ ने तत्काल पशु चिकित्सकों डॉ. मयंक राठौर, डॉ. रतन, समरथ मालवीय और सचिन धनगर को मौके पर भेजा। चिकित्सकों की टीम ने गाय की जांच की तो गर्भ में बच्चा उल्टा होने के कारण मामला बेहद जटिल पाया गया।
डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद मिली सफलता
पशु चिकित्सकों ने मौके पर ही डिलीवरी की प्रक्रिया शुरू की। करीब डेढ़ घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद चिकित्सकों ने सुरक्षित तरीके से गाय की डिलीवरी करवाई। इस दौरान गाय और नवजात बच्चे दोनों की जान बच गई।
गऊ सेवा दल के सदस्यों ने बताया कि यदि कुछ समय और डिलीवरी नहीं होती तो गाय और उसके बच्चे दोनों का बचना मुश्किल हो सकता था। समय पर पशु चिकित्सकों के पहुंचने और उपचार मिलने से दोनों की जान बच सकी
