
सौसर, सौसर विकास खंड अंतर्गत आने वाली बहुचर्चित ग्राम पंचायत रामाकोना में सरपंच पद को लेकर चल रही सियासी और प्रशासनिक खींचतान में एक नया और अहम मोड़ आ गया है। उच्च न्यायालय, जबलपुर ने सौसर एसडीएम द्वारा 31 जुलाई को जारी उस आदेश के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक (Stay) लगा दी है, जिसके जरिए स्थानापन्न सरपंच के चुनाव को स्वतः शून्य घोषित किया गया था।
*बिना नोटिस दिए आदेश जारी करने पर अदालत सख्त -*
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की एकल पीठ ने याचिकाकर्ता ज्योति खंडाइत द्वारा दायर रिट याचिका (क्रमांक 33317/2026) पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया।
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मृगेंद्र सिंह सहयोगी अधिवक्ता जयदीप कौरव एवं अनिकेत तिवारी ने पक्ष रखते हुए अदालत को बताया कि 29 जून 2026 को विधिवत निर्वाचन प्रक्रिया संपन्न कराकर याचिकाकर्ता को ग्राम पंचायत रामाकोना का स्थानापन्न सरपंच निर्वाचित किया गया था और निर्वाचन प्रमाणपत्र भी सौंपा गया था। इसके ठीक एक माह बाद 31 जुलाई को प्रशासन ने बिना कोई कारण बताओ नोटिस जारी किए और बिना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के तहत सुनवाई का अवसर दिए पूरी निर्वाचन प्रक्रिया और प्रमाणपत्र को निरस्त कर दिया।
*राज्य शासन की दलील-*
शासन की ओर से उपस्थित शासकीय अधिवक्ता विनीत सिंह ने तर्क दिया कि पूर्व सरपंच को पद से हटाने की कार्यवाही अभी विचाराधीन थी और उस पर कोई अंतिम आदेश पारित नहीं हुआ था। ऐसी स्थिति में सरपंच पद तकनीकी रूप से रिक्त न होने के कारण स्थानापन्न सरपंच की नियुक्ति प्रक्रिया वैध नहीं मानी जा सकती थी।
*चार सप्ताह बाद होगी अगली सुनवाई-*
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पाया कि नियुक्ति के एक माह बाद बिना किसी पूर्व नोटिस के आक्षेपित आदेश पारित किया गया है। परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए उच्च न्यायालय ने 31 जुलाई 2026 के आक्षेपित आदेश के प्रभाव एवं क्रियान्वयन पर आगामी सुनवाई तक रोक लगाने के निर्देश दिए। साथ ही मामले को विचारार्थ चार सप्ताह बाद सूचीबद्ध करने का आदेश दिया गया है।
