
मंदसौर। थाना मल्हारगढ़ पुलिस ने इथेनॉल प्लांट स्थापना के नाम पर कथित धोखाधड़ी कर करोड़ों रुपये वसूलने के झूठे आरोप पर पुणे (महाराष्ट्र) की एक निजी नामी एवं प्रतिष्ठित कंपनी के पांच अधिकारियों के विरुद्ध बिना किसी प्रारंभिक जांच किये एक दिन में ही आवेदन की दिनांक को ही भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) के तहत प्रकरण दर्ज किया था।
मामले के अनुसार फरियादी यश गर्ग पिता योगेश गर्ग, निवासी मंदसौर ने थाना मल्हारगढ़ में लिखित फर्जी शिकायत प्रस्तुत की। जिसमें प्लांट लगने और चालू होने के बाद संबंध झूठा विवाद पैदा कर प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करवाई गई।
फरियादी के अनुसार सिविल विवाद उत्पन्न हुआ था जिसको आपराधिक रंग देते हुए फरियादी ने विधि का दुर्पयोग करते हुए पुणे की नामी कंपनी के अधिकारियों के विरूद्ध झूठी रिपोर्ट दर्ज करवा दी।
मैसर्स एसएसईपीएल टेक्नो प्राइवेट लिमिटेड एफआईआर की जानकारी होते हुए अपने विधिक अधिकारों का उपयोग करते हुए अग्रिम जमानत याचिका माननीय जिला सत्र न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कि एवं अपने समस्त वक्तवय अपने अभिभाषकगणों पौरूष रांका और विनित बड़ौलिया के माध्यम माननीय न्यायालय के समक्ष रखें। मााननीय न्यायालय ने यह मानते हुए स्वीकार कर लिया कि जो आरोप कंपनी पर लगाये गये है उनकी कोई वेधानिक या प्रारंभिक जांच नहीं करवाई गई है। अभिभाषकगणों ने बताया कि एक सिविल वाद को जबरन आपराधिक मामले का रूप दिया गया है अभिभाषकगणों के तर्को से सहमत होते हुए माननीय न्यायालय ने माधव सूर्यकांत उगिले (प्रबंध निदेशक), कांचनकुमार लक्ष्मण शेवाले पाटिल (निदेशक), विलास भगवंतराव पवार (निदेशक), आलोक माधवराव वानखेडे (निदेशक) तथा सुहास सुरडी (मुख्य कार्यकारी अधिकारी) की अग्रीम जमानत याचिका स्वीकार कर ली।
उल्लेखनीयस है कि मल्हारगढ पुलिस द्वारा पूर्व में एक भी छात्र को फर्जी रूप से एनडीपीएस एक्ट का आरोपी बनाया था उस मामले में भी मंदसौर एसपी ने पूरे थाने को सस्पेंड किया गया था लेकिन उसके बाद भी मल्हारगढ थाने की कार्यप्रणाली नहीं सुधरी। इस प्रकरण में भी एक दिन में शिकायत मिली और मल्हारगढ़ पुलिस ने उसी दिन बिना किसी जांच के एफआईआर दर्ज कर ली। मामले में सफल पैरवी अभिभाषकगण पौरूष रांका और विनित बड़ौलिया के द्वारा की गई।
