मजबूत प्रतिरोधक ढांचे की दिशा में आगे बढ़ रही है सेना : जनरल द्विवेदी

नयी दिल्ली 10 मार्च (वार्ता) सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने मंगलवार को कहा कि भारतीय सेना “एक नए युग की दहलीज पर खड़ी है, जो तकनीकी प्रगति, संगठनात्मक लचीलेपन और आत्मनिर्भरता से परिभाषित है” और जिसकी आधारशिला “सत्य, विश्वास और पारदर्शिता” जैसे मूल्यों पर टिकी है। जनरल द्विवेदी ने सिकंदराबाद स्थित कॉलेज ऑफ डिफेंस मैनेजमेंट की यात्रा के दौरान 21वें हायर डिफेंस मैनेजमेंट कोर्स के प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर से मिले अनुभव यह दर्शाते हैं कि भारत “प्रतिक्रियात्मक सुरक्षा रुख से सक्रिय प्रतिरोधक ढांचे” की ओर बढ़ रहा है।

उन्होंने भविष्य के संघर्षों में “बहु-क्षेत्रीय अभियानों, डेटा-केंद्रित युद्ध और मानव रहित प्रणालियों” का प्रभावी उपयोग करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। इस दौरान उन्होंने संस्थान के सिम्युलेटर डेवलपमेंट डिवीजन में भारतीय सेना के लिए उन्नत प्रशिक्षण समाधान विकसित करने के उद्देश्य से तैयार की जा रही स्वदेशी तकनीकी नवाचारों की भी समीक्षा की।

जनरल द्विवेदी ने बदलते सुरक्षा परिदृश्य के अनुरूप सेना के परिवर्तन के दृष्टिकोण को रेखांकित किया। उन्होंने सेना के आधुनिकीकरण को दिशा देने वाले परिवर्तन के पाँच स्तंभ बताए जिनमें प्रौद्योगिकी समावेशन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का एकीकरण, संगठनात्मक पुनर्गठन और सेना का आधुनिकीकरण,

मानव संसाधन विकास और नेतृत्व, तीनों सेनाओं का एकीकरण और संयुक्तता और स्वदेशीकरण और आत्मनिर्भरता शामिल है।

सेना प्रमुख ने कहा कि परिवर्तन प्रबंधन विकल्प नहीं बल्कि एक रणनीतिक आवश्यकता है। उन्होंने अधिकारियों से पाँच प्रकार की सोच विकसित करने का आह्वान किया—रचनात्मक, आलोचनात्मक, प्रणालीगत, संज्ञानात्मक और कल्पनाशील—ताकि संस्थागत अनुकूलन क्षमता बढ़े और सशस्त्र बलों में नवोन्मेषी समस्या-समाधान को बढ़ावा मिले। उन्होंने यह भी कहा कि वैचारिक स्पष्टता के साथ मापनीय परिचालन परिणामों के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।

युद्ध के बदलते स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए सेना प्रमुख ने कहा कि आधुनिक संघर्षों में एकीकृत बहु-क्षेत्रीय दृष्टिकोण के माध्यम से युद्ध की सभी पाँच पीढ़ियों का एक साथ उपयोग करना आवश्यक हो गया है। उन्होंने कहा कि ग्रे-जोन युद्ध को सभी स्तरों के कमान में समझना आवश्यक है—इकाई कमांडरों से लेकर सर्वोच्च सैन्य नेतृत्व तक।

उन्होंने सेना में मानव संसाधनों के सर्वोत्तम उपयोग की आवश्यकता पर जोर दिया और अधिकारियों की कमी को दूर करने तथा सामरिक स्तर पर नेतृत्व को मजबूत करने के लिए जूनियर कमीशंड अधिकारियों को सशक्त बनाने पर बल दिया। उन्होंने भैरव बटालियन और स्पेशल ऑपरेशन्स फोर्सेज ब्रिगेड जैसी नई परिचालन संरचनाओं के गठन का भी उल्लेख किया, जो उभरती सुरक्षा चुनौतियों के प्रति सेना की सक्रिय अनुकूलन क्षमता को दर्शाता है।

पाठ्यक्रम में भाग ले रहे मित्र देशों के अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों और संकाय सदस्यों के साथ बातचीत के दौरान सेना प्रमुख ने रणनीतिक प्रबंधन, नेतृत्व विकास और संसाधनों के कुशल उपयोग पर विचारों का आदान-प्रदान किया। उन्होंने कॉलेज ऑफ डिफेंस मैनेजमेंट की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्थान रणनीतिक नेतृत्व विकसित करने, तीनों सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाने और उच्च रक्षा प्रबंधन शिक्षा के माध्यम से भारत की रक्षा तैयारी को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

बाद में जनरल द्विवेदी ने सिम्युलेटर डेवलपमेंट डिवीजन का दौरा किया, जहाँ उन्होंने सैन्य प्रशिक्षण के लिए विकसित की जा रही अत्याधुनिक स्वदेशी तकनीकों की समीक्षा की। प्रदर्शित प्रणालियों में ऑगमेंटेड और वर्चुअल रियलिटी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ड्रोन, रोबोटिक्स और सिम्युलेटर आधारित प्रशिक्षण से जुड़ी उन्नत तकनीकें शामिल थीं, जो युद्ध प्रशिक्षण वातावरण में यथार्थता बढ़ाने के लिए बनाई गई हैं।

सिम्युलेटर डेवलपमेंट डिवीजन के कमांडेंट ब्रिगेडियर आशीष जोहर ने सेना प्रमुख को संगठन की विकास रूपरेखा और नवाचार-आधारित दृष्टिकोण के बारे में जानकारी दी, जिसका उद्देश्य सशस्त्र बलों के लिए स्वदेशी विशिष्ट तकनीकों को आगे बढ़ाना है। इस प्रस्तुति में प्रशिक्षण की वास्तविकता बढ़ाने, परिचालन तैयारी सुधारने और क्षमता विकास से जुड़ी चल रही पहलों को भी रेखांकित किया गया।

 

 

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