कांग्रेस में दो पिछड़ों के बीच राज्यसभा की दौड़

इंदौर: मध्यप्रदेश से कांग्रेस का एक राज्यसभा सांसद बनने की दौड़ चल रही है. दौड़ में पिछड़ा वर्ग समुदाय के दो नेता राज्यसभा जाने के लिए प्रयासरत हैं. यह बात अलग है कि प्रदेश की एक महिला सहित पिछड़ा वर्ग और अनुसूचित जाति के नेता भी राज्यसभा की दौड़ में शामिल है.कांग्रेस हाईकमान ने मध्यप्रदेश से दिग्विजयसिंह को बाहर करने का निर्णय ले लिया है. हाईकमान अब किसी युवा और पिछड़े वर्ग के नेता को राज्यसभा सांसद बनाने का इच्छुक हैं.

राज्यसभा की दौड़ में प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, महासचिव कमलेश्वर पटेल, पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ, पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव, पूर्व राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन, पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा के नाम चर्चा में है. उपरोक्त नामों में से पिछड़ा वर्ग को कांग्रेस साधना चाहती है, क्योंकि सबसे ज्यादा दूर कांग्रेस से पिछड़ा वर्ग जातियां ही हुई है. इसकी वजह यह है कि भाजपा ने 2003 से ही प्रदेश की कमान पिछड़ी जाति को सौंप रखी है.

भाजपा ने मध्यप्रदेश सहित उत्तरप्रदेश में भी पिछड़ी जाति के नेताओं को महत्वपूर्ण पदों पर बैठाया है. वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के पास सिंधिया जाने के बाद से ग्वालियर चंबल संभाग से कोई कद्दावर नेता नहीं बचा है. विंध्य और बुंदेलखंड क्षेत्र भी कांग्रेस के लिए बहुत महत्व का है, इस इलाके में भी पिछड़ी जाति के कई समाज है. इस समय दोनों क्षेत्र बिना प्रतिनिधित्व के है और चंबल एवं विंध्य को साधना कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती है. ऐसी चर्चा है कि नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार ने भी मालवा से अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष पद देने के बाद विंध्य क्षेत्र को प्रतिनिधित्व देने की बात कही है. पिछड़ा वर्ग के राजमणि पटेल के बाद से पिछड़ा वर्ग को राज्यसभा में प्रतिनिधित्व नहीं मिला है. दो बार दिग्विजयसिंह बन गए.

नटराजन का नाम सबसे आगे
बताया जा रहा है कि मंदसौर की पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन का नाम सबसे आगे चल रहा है, लेकिन उनके साथ मालवा क्षेत्र से होने का खतरा है. यही बात पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव पर भी लागू हो रही है, वे भी मालवा से आते है. तीसरा नाम है सज्जन सिंह वर्मा का , वे भी मालवा क्षेत्र से ही आते है, लेकिन पिछड़े की बजाय अनुसूचित जाति से होने का लाभ मिल सकता है, यदि कांग्रेस को अनुसूचित जाति को उपकृत करना रहा तो ही, अन्यथा सज्जन भी दौड़ से बाहर है. कमलनाथ के संबंध गांधी परिवार से पहले जैसे नहीं है, लेकिन वे प्रयास कर रहे हैं. इन सब के बीच जो मुख्य नाम है वह जीतू पटवारी और कमलेश्वर पटेल का है. जीतू प्रदेश कांग्रेस चला रहे है और पार्टी के लिए खर्चा भी कर रहे हैं. पिछड़ा वर्ग से भी है. इस कारण जीतू की संभावना सबसे प्रबल दावेदार कर रूप में है, लेकिन मालवा क्षेत्र से प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष होने का नुकसान भी हो सकता है. तीसरा पद भी मालवा से देने के बाद प्रदेश के विंध्य और चंबल संभाग में पार्टी नेताओं में असंतोष पैदा होने का खतरा भी है.

पटेल की विंध्य क्षेत्र में मजबूत पकड़
माना जा रहा है कि विंध्य कांग्रेस के युवा नेता और पार्टी महासचिव रहे कमलेश्वर पटेल के नाम पर भी विचार हो रहा है. पटेल भी पिछड़ा वर्ग से आते है और विंध्य क्षेत्र में मजबूत पकड़ वाले नेता भी हैं. क्षेत्र के पिछड़ा वर्ग समुदाय में वर्चस्व भी रखते है. पटेल को दिग्विजयसिंह, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की सहमति के साथ विंध्य से होने का फायदा मिल सकता है. पटेल के पिता इंद्रजीत सिंह पटेल दिग्विजय मंत्रिमंडल में मंत्री थे. सिंघार ने पार्टी हित में बात कह दी की मालवा से दो वर्ग को नेतृत्व है, इसलिए विंध्य के पिछड़ा और अनुसूचित जाति बहुल क्षेत्र को साधना हितकारी हो सकता है.
जो भी हो , लेकिन राज्यसभा की दौड़ दो पिछड़े नेताओं के बीच चल रही है। अब देखना होगा कि पटवारी या पटेल कौन बाजी मारता है. कांग्रेस को महिला को लेना रहा तो फिर मीनाक्षी नटराजन पर सहमति बन सकती है.

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