प्रवेश कुमार मिश्र
नई दिल्ली:उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए भाजपा संसदीय बोर्ड ने अपने उम्मीदवार के रूप में महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन के नाम पर मुहर लगाकर बहुस्तरीय व बहुकोणीय समीकरण को साधने का प्रयास किया है.सूत्रों की मानें तो विभिन्न नामों पर वृहद स्तर पर विचार विमर्श के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सुझाव को विशेष महत्व देते हुए पार्टी ने विचारधारा के प्रति समर्पित वचनबद्धता, क्षेत्रीयता,भाषाई आधार,जातीय समीकरण समेत विभिन्न मानदंडों पर खरा उतरने वाले राधाकृष्णन के नाम पर मुहर लगाई है.
सूत्र बता रहे हैं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी दक्षिण भारत से संबंध रखने वाले पार्टी व संघ की विचारधारा को अपनाकर लगातार दक्षिण भारतीय राजनीति में पार्टी को जागरूक व जागृत रखने वाले दो बार के सांसद रहे राधाकृष्णन को आरंभिक चर्चा में ही महत्व देते हुए उनके नाम पर अपनी सहमति दे दी थी.जानकारों की मानें तो भाजपा ने उक्त निर्णय से न सिर्फ दक्षिण भारतीय राजनीति को साधने का प्रयास किया है बल्कि ओबीसी वर्ग को साधते हुए विपक्षी धार को कुंद करने का प्रयास किया है.
क्योंकि पिछले दिनों विपक्षी दलों की ओर से ओबीसी राजनीति को लेकर नई बहस छेड़ कर इस मुद्दे को खुब उछाला था जबकि दूसरी ओर भाषा को लेकर दक्षिण भारतीय राजनीति में एक अलग माहौल बनाने का प्रयास किया गया था. लेकिन उसी समय सरकार व संघ की ओर से जो बयान दिया गया था उससे स्पष्ट था कि भाजपा दक्षिण भारतीय राजनीति को लेकर काफी सजग है. संभवतः इसी वजह से बीच के दिनों किसी दक्षिण भारतीय नेता को पार्टी अध्यक्ष की जिम्मेदारी देने को लेकर भी सुगबुगाहट आरंभ हुई थी.
जानकार मान रहे हैं कि भाजपा की इस रणनीति से डीएमके जैसे दक्षिण भारतीय राजनीतिक दल के सामने क्षेत्रीय अस्तित्व व अस्मिता को बचाए रखने की चुनौती खड़ी हो जाएगी. ऐसी स्थिति में इंडिया गठबंधन की एकजुटता कमजोर पड़ सकती है. वैसे भी अंकगणित के हिसाब से राजग गठबंधन भारी है फिर भी सत्ताधारी भाजपा कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती है
