जयशंकर ने लाल सागर संकट, समुद्री सुरक्षा पर चिंता जतायी

टोक्यो, (वार्ता) विदेश मंत्री एस जयशंकर ने गुरुवार को लाल सागर संकट पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि समुद्री रक्षा और सुरक्षा भारत और जापान के लिए विशेष रूप से गंभीर चिंता का विषय बन गया है।

जापान की राजधानी टोक्यो में ओआरएफ की ओर से आयोजित रायसीना गोलमेज कार्यक्रम में बोलते हुए डॉ जयशंकर ने कहा, “रक्षा और सुरक्षा कम कठिन नहीं है।
समुद्री रक्षा और सुरक्षा विशेष रूप से चिंता का विषय बन चुकी हैं।
हम देख सकते हैं कि लाल सागर दैनिक रूप से हताहतों और शिपिंग व्यवधानों का सामना कर रहा है।

विदेश मंत्री ने यह टिप्पणी दक्षिणी यमन में एक मालवाहक जहाज पर हूती द्वारा किए गए मिसाइल हमले में चालक दल के तीन सदस्यों की मौत के बाद की है।
हूती ने इस हमले की जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि उसने यह हमला गाजा में इजरायल और हमास के बीच युद्ध में फिलिस्तीनियों का समर्थन करने के लिए किया।

उन्होंने कहा , “वैश्विक दक्षिण की आवाज के रूप में, भारत अपनी जिम्मेदारी के प्रति सचेत है; आज हमारे विकास के प्रयास विभिन्न महाद्वीपों के 78 देशों में फैले हुए हैं, क्या भारत और जापान अपनी विकास प्रणालियों के संबंध में समन्वय कर सकते हैं?”
डॉ जयशंकर ने अपने संबोधन में भारत और जापान के बीच ‘विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी’ की प्रशंसा की और कहा कि यह बहुत महत्वपूर्ण है कि दोनों देशों के बीच समग्र संतुलन को निरंतर रखा जाए।
उन्होंने वैश्विक व्यवस्था के सामने आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए भारत और जापान के उद्देश्य पर बात करते हुए ये मुद्दे उठाए।

विदेश मंत्री ने कहा कि भारत आज अपने पूर्व और पश्चिम में प्रमुख गलियारों पर काम कर रहा है।
इनमें अरब प्रायद्वीप और अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा के माध्यम से आईएमएसी पहल और पूर्व की ओर, त्रिपक्षीय राजमार्ग शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि इन गलियरों का निर्माण संपन्न होने के बाद, एशिया के माध्यम से अटलांटिक को प्रशांत से जोड़ दिया जाएगा और भारत और जापान के पास पारदर्शी और सहयोगी संपर्क की आवश्यकता के बारे में अभिसारी विचार हैं।

विदेश मंत्री ने कहा , “एशिया में बहुध्रुवीयता के लिए दो शक्तियां बहुत महत्वपूर्ण हैं, यह हमारे साझा हित में भी है कि हम समग्र संतुलन स्वतंत्रता, खुलापन, पारदर्शिता और नियम-आधारित व्यवस्था के पक्ष में रहे।
” उन्होंने हालांकि यह भी कहा कि दुनिया देखेगी कि हम विभिन्न संबंधों और पहलों के माध्यम से साझा हितों और लक्ष्यों में किस प्रकार से एक-दूसरे का समर्थन करते हैं।

विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि दोनों नेताओं के क्षेत्रीय एवं वैश्विक महत्व के साथ द्विपक्षीय मामलों पर चर्चा करने और स्वतंत्र, समावेशी, शांतिपूर्ण, समृद्ध और भारत-प्रशांत के लिए सहयोग पर विचारों का आदान-प्रदान करने की उम्मीद है।

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