दिल्ली में एसआईआर-विरोधी मार्च को पुलिस ने रोका, प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की

नयी दिल्ली, 23 अक्टूबर (वार्ता) दिल्ली में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ निकाले जा रहे एक विरोध मार्च को पुलिस ने शुक्रवार को रोक दिया।

प्रदर्शनकारी चुनाव आयोग (ईसीआई) के मुख्यालय की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस कवायद से योग्य मतदाताओं के नाम सूची से बाहर हो सकते हैं।

‘पीपल अगेंस्ट एसआईआर’ की दिल्ली समन्वय समिति आयोजित यह प्रदर्शन कालीबाड़ी मार्ग और भाई वीर सिंह मार्ग के जंक्शन पर गोल डाक खाना के पास शुरू हुआ।

प्रदर्शनकारी मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया को वापस लेने, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने और लोकतंत्र की बहाली की मांग को लेकर चलाए जा रहे एक व्यापक अभियान के बैनर तले एकजुट हुए थे। यह मार्च एसआईआर प्रक्रिया के खिलाफ बढ़ते लामबंदी का हिस्सा था, जिसमें आयोजकों ने छात्रों, किसानों, मजदूरों और नागरिक समाज का प्रतिनिधित्व करने वाले समूहों को एक मंच पर लाया। इस साझा मंच ने पहले राष्ट्रीय राजधानी से परे अपने अभियान को ले जाने की योजना की घोषणा की थी, जिसके लिए “हर गली में जंतर-मंतर, हर गांव में जंतर-मंतर, मेरा घर जंतर-मंतर” का नारा दिया गया था।

मंच ने गत 18 अक्टूबर को जारी एक बयान में कहा था कि लोकतंत्र की पुनर्बहाली के लिए उसका मार्च किसी भी स्थान पर पुलिस से अनुमति नहीं मांगेगा। इसने पुलिस, अर्धसैनिक बलों और जेल अधिकारियों को शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग न करने की चेतावनी भी दी थी।

‘पीपल अगेंस्ट एसआईआर’ का गठन 14 अक्टूबर को नयी दिल्ली के सुरजीत भवन में हुआ था, जिसमें किसानों, मजदूरों, महिलाओं, छात्रों, आदिवासियों, दलितों और अल्पसंख्यक समुदायों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठनों ने भाग लिया था। इस समूह ने मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया की वैधता पर सवाल उठाया है और मांग की है कि मतदाता सूचियों को 2024 से पहले के संस्करण में बहाल किया जाये, जिसके बाद सामाजिक अंकेक्षण (सोशल ऑडिट) के माध्यम से उन्हें अद्यतन किया जाये। इसका तर्क है कि पुनरीक्षण को चुनाव आयोग के अपने मैनुअल और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) के दिशा-निर्देशों का पालन करना चाहिए।

इस बीच कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं आशुतोष रांका और सौरभ दास ने आंदोलन जारी रखने के अपने संकल्प को दोहराया। श्री दास ने दावा किया कि अंततः ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना ही पड़ेगा।

दोनों नेता अपने खिलाफ दर्ज अलग-अलग मामलों के सिलसिले में शुक्रवार को मंदिर मार्ग थाने में विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश हुए।

मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश होने के बाद श्री रांका ने संवाददाताओं से कहा, “आंदोलन जारी है। हम इस मंच के संरक्षक हैं, जो इस देश की जनता ने हमें सौंपा है। हम बस अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश कर रहे हैं। हमारे जेल में होने पर भी आंदोलन जारी रहेगा।” उन्होंने कहा कि इस अनुभव ने समूह को अपने रुख का पुनर्मूल्यांकन करने और प्रशासन के कामकाज को समझने के लिए प्रेरित किया है। योजना को अंतिम रूप दिये जाने के बाद आगे की रणनीति की घोषणा की जायेगी।

श्री रांका ने यह भी बताया कि जमानतियों का सत्यापन पूरा हो चुका है और मामले को नवंबर के तीसरे सप्ताह की नयी तारीख दी गयी है। क्राइम ब्रांच द्वारा जारी एक नोटिस के संबंध में उन्होंने कहा कि नेता तारीख और समय की पुष्टि का इंतजार कर रहे हैं।

सीजेपी नेता ने कहा कि उन्होंने अधिकारियों को पिछली तारीख पर उपस्थित होने में असमर्थता व्यक्त कर दी थी।

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने संभावित विरोध प्रदर्शन से पहले एक एडवाइजरी जारी कर बंगला साहिब गुरुद्वारा, कनॉट प्लेस, संसद मार्ग और जंतर-मंतर के आसपास के इलाकों में दोपहर एक बजे से शाम पांच बजे के बीच मार्ग परिवर्तन की घोषणा की थी। यात्रियों को प्रभावित मार्गों से बचने, अपनी यात्रा की योजना पहले से बनाने और यातायात कर्मियों के दिए गए निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गयी थी।

 

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