
ग्वालियर। संगीत, कला और सांस्कृतिक विरासत की समृद्ध परंपरा के लिए विश्वभर में विशिष्ट पहचान रखने वाले ग्वालियर में 21वाँ आईटीएम अंतरराष्ट्रीय उद्भव उत्सव 2026 कल 24 से 27 अक्टूबर तक आयोजित किया जाएगा। ‘प्रमोटिंग ग्लोबल यूनिटी थ्रू कल्चर’ की थीम पर आयोजित होने वाला यह इंटरनेशनल कल्चरल ओलंपियाड देश-विदेश की विविध संस्कृतियों, कलात्मक अभिव्यक्तियों और वैश्विक एकता का उत्सव बनेगा। चार दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में ग्वालियर की धरती पर मानो एक लघु विश्व साकार होगा।
उत्सव का विधिवत उद्घाटन 24 अक्टूबर को शाम 5:30 बजे जीवाजी क्लब में होगा। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि महापौर शोभा सिकरवार होंगी, जबकि भारत में मंगोलिया के राजदूत उलजीत लवसेनजात समारोह की अध्यक्षता करेंगे। हिमालय कल्चरल फाउंडेशन के अध्यक्ष एल.पी. पोंटसेंग की विशेष उपस्थिति रहेगी। आईटीएम यूनिवर्सिटी के प्रो-चांसलर दौलत सिंह चौहान, डॉ. बी.आर. श्रीवास्तव, जीवाजी क्लब के अध्यक्ष राजू सेठ, आईटीएम यूनिवर्सिटी के कुलगुरु प्रोफेसर डॉक्टर योगेश उपाध्याय और रजिस्ट्रार ओमवीर सिंह सहित अन्य अतिथि समारोह की गरिमा बढ़ाएँगे।
रंग-बिरंगे कार्निवल से होगा सांस्कृतिक एकता का संदेश
उद्भव उत्सव के शुभारंभ के अवसर पर 24 अक्टूबर को दोपहर 3 बजे से एक भव्य सांस्कृतिक कार्निवल निकाला जाएगा। डॉ. भगवत सहाय सभागार परिसर से शुरू होकर जीवाजी क्लब तक पहुँचने वाले इस कार्निवल में देश-विदेश से आए एक हजार से अधिक कलाकार अपनी सांस्कृतिक पहचान, पारंपरिक वेशभूषा और उत्साहपूर्ण सहभागिता के माध्यम से विविधता में एकता का संदेश देंगे। रंग-बिरंगे परिधानों में सजे कलाकार जब विभिन्न संस्कृतियों की झलक प्रस्तुत करते हुए आगे बढ़ेंगे, तब ग्वालियर की सड़कों पर विश्व की सांस्कृतिक विविधता का जीवंत दृश्य देखने को मिलेगा। कार्निवल में पुलिस बैंड की मनमोहक धुनें कलाकारों के उत्साह को और बढ़ाएँगी। यह आयोजन केवल सांस्कृतिक प्रस्तुतियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि विभिन्न देशों और समुदायों के बीच आपसी सद्भाव, संवाद और वैश्विक एकजुटता का संदेश भी देगा।
पहली बार दिव्यांग कलाकारों को मिलेगा उद्घाटन मंच
इस वर्ष के उद्भव उत्सव का एक विशेष आकर्षण दृष्टिबाधित दिव्यांग बालिकाओं की नृत्य प्रस्तुति होगी। पहली बार उद्घाटन समारोह में इन बालिकाओं को अपनी कला और प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर दिया जा रहा है। यह पहल उत्सव की सांस्कृतिक भावना को सामाजिक समावेश और समान अवसरों के संकल्प से जोड़ती है। उद्भव सांस्कृतिक एवं क्रीड़ा संस्थान के अध्यक्ष डॉ. केशव पांडेय और सचिव दीपक तोमर ने संयुक्त रूप से बताया कि संस्था का उद्देश्य दिव्यांगजनों के भीतर निहित कला, प्रतिभा और रचनात्मक क्षमताओं को पहचानकर उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंच उपलब्ध कराना है। उनका कहना है कि शारीरिक सीमाएँ किसी व्यक्ति की प्रतिभा, कल्पनाशीलता और अभिव्यक्ति की संभावनाओं को सीमित नहीं कर सकतीं। आवश्यकता केवल इस बात की है कि उन्हें अपनी क्षमता प्रदर्शित करने के लिए उचित अवसर और प्रोत्साहन मिले।
उन्होंने कहा कि दृष्टिबाधित बालिकाओं की प्रस्तुति इसी सोच का प्रतीक है। उद्भव का प्रयास है कि कला के माध्यम से समाज में संवेदनशीलता, समानता और आत्मविश्वास की भावना को बढ़ावा दिया जाए। जब दिव्यांग कलाकारों को अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलता है, तो उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और समाज को भी उनकी क्षमताओं को नए दृष्टिकोण से देखने की प्रेरणा मिलती है।
दो दशक की यात्रा, वैश्विक मंच पर भारतीय संस्कृति की पहचान
पत्रकार वार्ता में उद्भव सांस्कृतिक एवं क्रीड़ा संस्थान के अध्यक्ष डॉ. केशव पांडेय, सचिव दीपक तोमर, आईटीएम यूनिवर्सिटी के कुलगुरु प्रोफेसर डॉ. योगेश उपाध्याय, रजिस्ट्रार ओमवीर सिंह तथा उप रजिस्ट्रार अनिल माथुर ने संयुक्त रूप से बताया कि उद्भव की यात्रा ग्वालियर की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और उसे नई पीढ़ियों तक पहुँचाने के संकल्प के साथ आगे बढ़ी है। छोटे स्तर पर शुरू हुआ यह प्रयास आज अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक आयोजन का स्वरूप ले चुका है। इसके पीछे संस्था की पूरी टीम का निरंतर परिश्रम, समर्पण और सामूहिक प्रतिबद्धता रही है। समाज के विभिन्न वर्गों, शिक्षण संस्थानों, कला-संस्कृति से जुड़े लोगों और सहयोगियों के समर्थन ने भी इस यात्रा को मजबूती प्रदान की है।
उन्होंने कहा कि उद्भव उत्सव का उद्देश्य केवल कलाकारों को मंच देना नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपराओं को दुनिया के सामने प्रस्तुत करना और विभिन्न देशों की सांस्कृतिक विरासत को समझने तथा सम्मान देने का अवसर उपलब्ध कराना भी है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने के साथ-साथ वैश्विक दृष्टिकोण विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
