भोपाल: राजधानी के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित राष्ट्रीय मत्स्य सम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश में मत्स्य पालन को उद्योग के रूप में विकसित करने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि फिशरीज सेक्टर को फूड प्रोसेसिंग और MSME से जोड़ा जाएगा, जिससे इस क्षेत्र से जुड़े लोगों को अन्य उद्योगों की तरह छूट और प्रोत्साहन मिल सकेंगे। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह और केंद्रीय राज्य मंत्री एसपी सिंह बघेल भी शामिल हुए। इस दौरान ‘मध्य प्रदेश मत्स्य निवेश एवं निर्यात मार्गदर्शिका’ का विमोचन किया गया।
सम्मेलन में प्रदेश में मत्स्य उत्पादन बढ़ाने, निजी निवेश आकर्षित करने और मछली के निर्यात को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। इंदिरा सागर, बरगी, बाणसागर और बारना जलाशयों में आधुनिक केज कल्चर विकसित करने के लिए 7,430 करोड़ रुपए के निवेश की योजना है। इससे करीब 4 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त मछली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।
मध्यप्रदेश एकीकृत मत्स्योद्योग नीति-2026 के तहत अगले तीन वर्षों में मछली उत्पादन दोगुना करने और जलाशयों में करीब एक लाख केज स्थापित करने की तैयारी है। वहीं, प्रदेश में मछली पालन के साथ बतख पालन, मोती उत्पादन, मखाना और सब्जियों की खेती को भी बढ़ावा दिया जाएगा। नीति के तहत करीब 40 हजार करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव मिले हैं, जिनसे लगभग 3.5 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार व स्वरोजगार के अवसर बनने का अनुमान है। सरकार का लक्ष्य मत्स्य पालन को उत्पादन से लेकर प्रोसेसिंग, भंडारण, परिवहन और निर्यात तक एक मजबूत उद्योग के रूप में विकसित करना है।
