बारिश का पानी डेम में संग्रहित कर उसे शिप्रा में छोड़ेंगे, इससे होगा सिंहस्थ में स्नान

उज्जैन। सिंहस्थ के दौरान मोक्षदायिनी मां शिप्रा में डुबकी लगाने वाले साधु-संतों और करोड़ों श्रद्धालुओं को अब शिप्रा के अपने जल से स्नान कराने की बड़ी तैयारी चल रही है। अब तक गर्मी के दिनों में शिप्रा का जलस्तर घटने पर कभी गंभीर तो कभी नर्मदा का पानी नदी में छोडऩा पड़ता था। अब बरसात के पानी को संग्रहित कर श्रद्धालुओं के लिए स्नान लायक बनाया जाएगा।

वर्ष 2016 के सिंहस्थ में भी स्नान के लिए बाहरी जलस्रोतों का सहारा लेना पड़ा। अब सिंहस्थ-2028 में यह तस्वीर बदलने की उम्मीद है। बारिश के दौरान शिप्रा में बहने वाले पानी को सहेजकर जरूरत के समय दोबारा नदी में प्रवाहित करने की योजना अब आकार लेने लगी है।

सिलारखेड़ी-सेवरखेड़ी प्रोजेक्ट का 84 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। 600 करोड़ की यह योजना पूरी होने पर शिप्रा के पानी को संग्रहित कर लंबे समय तक नदी में जलप्रवाह बनाए रखने का रास्ता खुलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के गृह नगर उज्जैन में सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के बीच शिप्रा के जल को लेकर यह परियोजना विशेष महत्व रखती है। मुख्यमंत्री की मंशा है कि सिंहस्थ में आने वाले साधु-संतों और श्रद्धालुओं को शिप्रा के ही जल से स्नान करने का अवसर मिले। इसके लिए बारिश के दिनों में बहकर आगे निकल जाने वाले पानी को रोककर विशाल जलाशय में संग्रहित किया जाएगा। जरूरत पडऩे पर यही पानी वापस शिप्रा में छोड़ा जाएगा। इससे सिंहस्थ के दौरान नदी में पर्याप्त जल उपलब्ध कराने के साथ ही वर्ष के अन्य महीनों में भी जलप्रवाह बनाए रखने में मदद मिल सकेगी।

यहां से यह जल शनि मंदिर, गऊघाट, रामघाट, मंगलनाथ और सिद्धनाथ क्षेत्र की ओर प्रवाहित होगा। इससे सिंहस्थ के प्रमुख स्नान क्षेत्रों में जल की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिलेगी। योजना के अनुसार संग्रहित पानी को एक साथ छोडऩे के बजाय आवश्यकता के अनुरूप धीरे-धीरे प्रवाहित किया जाएगा, ताकि लंबे समय तक नदी में पानी बना रहे। उज्जैन में शिप्रा का जलप्रवाह गर्मी के दिनों में कम हो जाना वर्षों से बड़ी समस्या रहा है। विशेषकर सिंहस्थ जैसे विशाल धार्मिक आयोजन के दौरान पर्याप्त और स्वच्छ जल उपलब्ध कराना प्रशासन के लिए चुनौती बनता रहा है। सिलारखेड़ी-सेवरखेड़ी योजना से इस चुनौती का स्थायी समाधान मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। परियोजना के तहत संग्रहित पानी से करीब नौ महीने तक शिप्रा में जलप्रवाह बनाए रखने का लक्ष्य है।

बैराज बनाए लिए-बिना मोटर के वापस शिप्रा में पहुंचेगा पानी  

योजना के तहत शिप्रा नदी पर सेवरखेड़ी गांव में 1.45 मिलियन क्यूबिक मीटर क्षमता का बैराज बनाया गया है। बारिश के दौरान बैराज में जमा होने वाले पानी को चार शक्तिशाली मोटरों की सहायता से लगभग साढ़े छह किलोमीटर दूर सिलारखेड़ी पहुंचाया जाएगा। प्रत्येक मोटर की क्षमता 1350 किलोवाट है। जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री शुभम अग्रवाल के अनुसार, सेवरखेड़ी से पानी उठाकर सिलारखेड़ी के विशाल जलाशय में पहुंचाने की व्यवस्था तैयार की जा रही है। पंपिंग स्टेशन और बैलेंसिंग रिजर्वायर से जुड़े शेष कार्य भी तेजी से चल रहे हैं। इस परियोजना की खास बात यह है कि सिलारखेड़ी में पानी पहुंचाने के लिए तो मोटरों का उपयोग होगा, ऐसे मे संग्रहित पानी को वापस शिप्रा नदी में छोडऩे के लिए पंपिंग की जरूरत नहीं पड़ेगी। जलाशय से करीब पांच किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के माध्यम से गुरुत्वाकर्षण के सहारे पानी कुंवारिया गांव के पास शिप्रा में पहुंचाया जाएगा। यह स्थान किठोदा बैराज के ऊपरी हिस्से में है।

250 हेक्टेयर का जलाशय

सिलारखेड़ी के पुराने तालाब को विस्तार देकर करीब 250 हेक्टेयर क्षेत्र में विशाल बैलेंसिंग रिजर्वायर का स्वरूप दिया जा रहा है। इसके लिए अधिकांश शासकीय भूमि का उपयोग किया गया है, जबकि करीब 35 हेक्टेयर निजी जमीन अधिग्रहित की गई है। जलाशय में 51 एमसीएम यानी लगभग 1800 एमसीएफटी पानी संग्रहित करने की क्षमता होगी। तुलना करें तो गंभीर बांध की क्षमता करीब 2200 एमसीएफटी है। इसकी ऊंचाई लगभग 20 मीटर बताई गई है। इस तरह बारिश के दिनों में पानी संग्रहित कर जलाशय को पूरी क्षमता तक भरा जा सकेगा।

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