वाराणसी, 22 अक्टूबर (वार्ता) प्रधानमंत्री एवं वाराणसी के सांसद नरेंद्र मोदी के 25 अक्टूबर को प्रस्तावित काशी दौरे को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने भव्य स्वागत की तैयारियां तेज कर दी हैं। पुलिस लाइन से नमोघाट तक विभिन्न स्थानों पर स्वागत केंद्र बनाए गए हैं, जहां ढोल-नगाड़ों, डमरू वादन, शंखनाद और सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुतियों के बीच ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय श्रीराम’ के उद्घोष से प्रधानमंत्री का अभिनंदन किया जाएगा। उनके यात्रा मार्ग पर पुष्पवर्षा कर स्वागत करने की भी तैयारी है।
भाजपा काशी क्षेत्र के अध्यक्ष अशोक चौरसिया ने गुरुवार को बताया कि प्रधानमंत्री 25 अक्टूबर को पूर्वाह्न करीब 10 बजे वाराणसी हवाई अड्डे पहुंचेंगे। वहां से हेलीकॉप्टर से मिर्जामुराद जाएंगे, जहां अरविंद मिल का उद्घाटन करेंगे। इसके बाद दोपहर करीब 12 बजे हेलीकॉप्टर से पुलिस लाइन पहुंचेंगे और सड़क मार्ग से नमोघाट जाएंगे। यहां गंगा के ऊपर आयोजित भारतीय वायुसेना के भव्य एयर शो में शामिल होंगे।
श्री चौरसिया ने बताया कि श्री मोदी के सड़क मार्ग से गुजरने के दौरान बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता और काशीवासी निर्धारित स्वागत केंद्रों पर मौजूद रहेंगे। इन केंद्रों पर गुलाब की पंखुड़ियों की वर्षा, पारंपरिक वाद्ययंत्रों के वादन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से उनका स्वागत किया जाएगा। पार्टी ने कार्यकर्ताओं को अलग-अलग स्थानों पर स्वागत की जिम्मेदारी सौंपी है, ताकि पूरे मार्ग पर उत्सव जैसा माहौल बनाया जा सके।
उन्होंने बताया कि पुलिस लाइन के मुख्य द्वार, पुलिस लाइन चौराहा, खजुरी-मकबूल आलम रोड पर यस बैंक के सामने, हुकुलगंज तिरमुहानी, चौकाघाट लकड़ी मंडी, सिटी स्टेशन के सामने, गोलगड्डा चौराहा रेलवे अंडरपास, भदऊं चुंगी, रेलवे पुल से पहले, नमोघाट जाने वाली ढलान और नमोघाट मोड़ स्थित सीएनजी स्टेशन के सामने स्वागत केंद्र बनाए गए हैं। नमोघाट पर भी स्वागत की विशेष व्यवस्था रहेगी।
श्री चौरसिया के अनुसार, नमोघाट पर आयोजित एयर शो दोपहर दो बजे समाप्त होने के बाद प्रधानमंत्री सड़क मार्ग से पुलिस लाइन पहुंचेंगे। वहां से हेलीकॉप्टर द्वारा बाबतपुर हवाई अड्डे जाएंगे और फिर विमान से दिल्ली के लिए रवाना होंगे।
प्रधानमंत्री के आगमन को देखते हुए भाजपा ने स्वागत की तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। पार्टी का लक्ष्य पारंपरिक वाद्ययंत्रों, धार्मिक उद्घोषों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए काशी की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान को प्रदर्शित करना है।
