सीएक्यूएम ने संबंधित एजेंसियों को प्रदूषण की रोकथाम के लिए सभी निर्धारित उपायों को सख्ती से लागू करने और उनकी नियमित निगरानी करने का निर्देश दिया है। आयोग आदेश के अनुसार, दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 20 अक्टूबर को 179 था, जो ‘मध्यम’ श्रेणी में आता है। हालांकि, 21 अक्टूबर को अपराह्न दो बजे तक यह बढ़कर 244 पर पहुंच गया और वायु गुणवत्ता ‘खराब’ श्रेणी में दर्ज की गयी।
मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) और भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) के पूर्वानुमानों का हवाला देते हुए आयोग ने कहा कि आने वाले दिनों में भी वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में बने रहने की आशंका है।
ग्रैप-1 के तहत निर्माण और तोड़फोड़ स्थलों पर धूल नियंत्रण के नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गये हैं। निर्माण सामग्री और मलबे को उचित तरीके से ढककर रखने, इनके परिवहन के दौरान ढके हुए वाहनों का इस्तेमाल करने तथा धूल उड़ने से रोकने के लिए एंटी-स्मॉग गन और पानी के छिड़काव की व्यवस्था करने को कहा गया है। सड़क निर्माण, चौड़ीकरण, मरम्मत और रखरखाव के स्थलों पर भी धूल नियंत्रण के उपाय तेज किए जाएंगे। निर्माण एवं तोड़फोड़ से निकलने वाले कचरे का पर्यावरण अनुकूल तरीके से प्रबंधन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गये हैं।
आयोग ने खुले में बायोमास और नगरपालिका के ठोस कचरे को जलाने पर लगे प्रतिबंध को सख्ती से लागू करने को कहा है। यातायात पुलिस को प्रमुख जाम वाले मार्गों, चौराहों और यातायात प्रभावित क्षेत्रों में पर्याप्त कर्मियों की तैनाती करने तथा ट्रैफिक सिग्नलों के बेहतर समन्वय के निर्देश दिए गये हैं, ताकि वाहनों की आवाजाही सुचारु रहे और जाम के कारण होने वाले प्रदूषण को कम किया जा सके।
सीएक्यूएम ने एनसीआर में उद्योगों, ईंट-भट्ठों और हॉट-मिक्स प्लांट सहित सभी संबंधित प्रतिष्ठानों पर लागू प्रदूषण नियंत्रण नियमों को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है।
