जबलपुर। न्याय की यात्रा केवल सत्य की खोज नहीं उसे प्रमाणित करने की सतत साधना भी है। जिसके आधार पर किसी मनुष्य के अधिकार, स्वतंत्रता और भविष्य का निर्णय होता है। कभी इस यात्रा का आधार प्रत्यक्षदर्शी की स्मृति और श्रुति परंपरा हुआ करती थी, तो आज इसकी कसौटी ई-मेल, व्हाट्सऐप संदेश, मोबाइल फोन, डिजिटल अभिलेख और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से निर्मित सामग्री तक विस्तृत हो गई है।
इसी परिवर्तनशील परिदृश्य में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के तत्वावधान में आयोजित व्याख्यान में हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार प्रशासन एवं इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य विधि के विशेषज्ञ हर्ष सिंह बहरावत ने ’‘इलेक्ट्रॉनिक एविडेंस’’ विषय पर अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं रोचक व्याख्यान दिया।
बौद्धिक यात्रा का इतिहास
व्याख्यान में बहरावत ने साक्ष्य की अवधारणा को केवल विधिक प्रावधानों तक सीमित न रखते हुए उसके ऐतिहासिक और दार्शनिक आयामों को भी उद्घाटित किया। उन्होंने कहा कि साक्ष्य का इतिहास वस्तुतः मनुष्य की उस बौद्धिक यात्रा का इतिहास है, जिसमें उसने सुनी हुई बात से देखी हुई बात तक, देखी हुई बात से प्रमाण तक और प्रमाण से न्याय तक पहुँचने का प्रयास किया है।
किसी संदेश का अस्तित्व उसके सत्य होने की गारंटी नहीं
श्री बहरावत ने कहा कि यह यात्रा आज एक ऐसे डिजिटल युग में प्रवेश कर चुकी है, जहाँ आँखों से दिखाई देने वाली प्रत्येक वस्तु सत्य नहीं और कानों से सुनाई देने वाली प्रत्येक बात प्रमाण नहीं। डिजिटल संसार में किसी संदेश का अस्तित्व उसके सत्य होने की गारंटी नहीं देता, किसी तस्वीर का दिखाई देना उसकी प्रामाणिकता का अंतिम प्रमाण नहीं है और किसी वीडियो का सजीव प्रतीत होना भी उसके वास्तविक होने की निर्णायक कसौटी नहीं रह गया है।
साक्ष्य संबंधी प्रश्न हुए और जटिल
कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल तकनीक के तीव्र विस्तार ने न्यायालयों के समक्ष साक्ष्य संबंधी प्रश्नों को और अधिक जटिल बना दिया है। ई-मेल, व्हाट्सऐप संदेश, मोबाइल फोन में सुरक्षित अभिलेख तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से प्राप्त डिजिटल सामग्री की प्रामाणिकता कैसे स्थापित किया जाये। उसमें किसी प्रकार की छेड़छाड़, परिवर्तन अथवा कृत्रिम निर्माण हुआ हो, तो उसे किस प्रकार उजागर किया जो, ये ऐसे प्रश्न हैं, जिनका महत्त्व अब केवल तकनीकी विशेषज्ञों तक सीमित नहीं, बल्कि प्रत्येक अधिवक्ता और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े व्यक्ति के लिए अनिवार्य हो गया है।
ये रहे उपस्थित
कार्यक्रम में हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मृगेंद्र सिंह, सचिव असीम त्रिवेदी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष विश्वास पलिया, उपाध्यक्ष सत्येन्द्र ज्योतिषी, महिला उपाध्यक्ष अनुराधा तिवारी चौबे, सह सचिव रुपेश पटेल, कोषाध्यक्ष सुशीला पालीवाल, लाइब्रेरी सचिव अजय शुक्ला, कार्य सारिणी सदस्य आशीष तिवारी, अर्नव तिवारी, विभा पाठक, अतुल द्विवेदी, शांति तिवारी, अभिजीत सोनी, आरती शर्मा, वरूण दुबे
वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल खरे, पूर्व सचिव पारितोष त्रिवेदी तथा टैक्स बार एसोसिएशन के महामंत्री एस. एस. ठाकुर सहित अन्य अधिवक्तागण उपस्थित रहे।
